मथार दियारा में गंगा किनारे खेत की रखवाली कर रहे दो बुजुर्ग किसान की ठनका गिरने से हुई मौत

Published by : RAJKISHORE SINGH Updated At : 27 May 2026 5:55 PM

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बारिश से बचने के लिए दोनों बुजुर्ग झोपड़ीनुमा घर में छिप गया. वहीं अचानक ठनका झोपड़ी पर गिर गया. ठनका से झोपड़ी में आग लग गयी. दोनों बुजुर्ग की झोपड़ी में जलकर मौत हो गयी.

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खगड़िया. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के मथार दियारा गांव के गंगा किनारे खेत की रखवाली कर रहे दो बुजुर्ग किसान पर ठनका गिरने से मौत हो गयी. घटना बीती मंगलवार देर रात की बतायी जा रही है. बताया जाता है कि थाना क्षेत्र के मथार दियारा गांव के वार्ड 7 निवासी स्व. जामुन यादव के 70 वर्षीय पुत्र किसान गोरेलाल यादव और बोतल मंडल 60 वर्षीय किसान पुत्र कपिलदेव मंडल उर्फ सापो यादव की ठनका गिरने से मौत हो गयी. ग्रामीणों ने बताया कि प्रत्येक दिन की तरह मंगलवार को भी गोरेलाल और कपिलदेव खेत में लगे परवल की रखवाली करने गए थे. बीती देर रात अचानक तेज आंधी, गर्जन और बारिश होने लगा. बारिश से बचने के लिए दोनों बुजुर्ग झोपड़ीनुमा घर में छिप गया. वहीं अचानक ठनका झोपड़ी पर गिर गया. ठनका से झोपड़ी में आग लग गयी. दोनों बुजुर्ग की झोपड़ी में जलकर मौत हो गयी. सुबह में खेत देखने गए किसानों ने देखा कि झोपड़ी जला हुआ है. दो व्यक्ति का शव आपस में चिपका है. किसानों ने घटना की जानकारी ग्रामीण व परिजनों को दी. घटनास्थल गंगा किनारे लोगों की भीड़ लग गयी. परिजनों ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान की. मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. इधर, घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सह शिक्षक नेता मनीष सिंह सदर अस्पताल पहुंचकर परिजनों को ढ़ाढ़स बढ़ाया. शिक्षक नेता जिला प्रशासन से मृतक के आश्रितों को आपदा के तहत मिलने वाली राशि मुहैया कराने की मांग की है.

बटाईदार खेती कर परिवार का करता था भरण पोषण

ग्रामीणों ने बताया कि कपिलदेव बटाईदार खेती कर परिवार का भरण पोषण करता था. खेती करने के लिए अपना जमीन नहीं है. बताया कि कपिलदेव को एक पुत्र है, वो भी पिता के खेतीबाड़ी में हाथ बढ़ाता था. ग्रामीणों ने बताया कि कपिलदेव गरीब व्यक्ति थे. पूरे दिन गंगा किनारे खेत में ही कार्य करते रहते थे. बताया कि मथार दियार गंगा किनारे दो बीघा में परवल लगाया हुआ था. जानवर व असमाजिक लोगों को बचाने के लिए पूरे रात खेत की रखबाड़ी करते थे. इसके साथ ही उसके पड़ोसी गोरेलाल यादव भी परवल खेत की रखवाली करते थे. बताया कि गोरेलाल भी दो बीघा जमीन पर परवल लगाए हुए थे. वे भी प्रतिदिन खेती की रखवाली करते थे. परवल को बाजार में व्यापारी के हाथों बेचकर परिवार का भरण पोषण करते थे. बताया कि गोरेलाल को अपना भी जमीन पर है. बताया कि गोरेलाल को चार पुत्र है, सभी पिता के खेती में हाथ बढ़ाते थे.

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