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आपदा से बचाव को लेकर राज्य स्तर को भेजा गया प्रस्ताव एक साल से है लंबित

Updated at : 20 Jul 2024 11:39 PM (IST)
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Liquor seized in Khagaria

आपदा से बचाव को लेकर राज्य स्तर को भेजा गया प्रस्ताव एक साल से है लंबित

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प्रतिनिधि, खगड़िया बाढ़, भूकंप, आगलगी, सड़क दुर्घटना आदि के दुष्प्रभाव को कम करने की योजना बनायी गयी थी. राज्य स्तर पर प्रस्ताव भेजकर राशि की मांग की गयी थी, लेकिन साल भर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिला स्तर से भेजे गए प्रस्ताव पर विभाग की मुहर नहीं लग पाने के कारण उक्त योजना पर कार्य आरंभ नहीं हो पाया है. जानकारी के मुताबि तत्कालीन डीएम डॉ आलोक रंजन घोष ने बाढ़ सहित अन्य आपदाओं से निपटने को लेकर 12 प्रोजेक्ट प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजकर 42.69 करोड़ रुपये की मांग की थी. राज्य आपदा न्यूनिकरण कोष से यह राशि जिले को मिलनी थी. इस राशि से जिले के करीब 16 लाख की आबादी को विभिन्न आपदाओं से बचाने या फिर सुरक्षा की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू होती है, लेकिन डीएम के स्तर से भेजे प्रस्ताव की न तो स्वीकृति मिली है और न ही राशि. इस कारण आपदा से निबटने तथा बचाव के लिए बनायी गयी एक बेहतरीन प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं पाया. गौरतलब है कि खगड़िया हमेशा से आपदा प्रभावित जिलों की सूची में शामिल रहा है. बाढ़ में हर साल एक लाख से अधिक आबादी प्रभावित हो जाती है. ठनका गिरने से भी बरसात के मौसम में अक्सर लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है. सड़क दुर्घटना की बात करें तो यह अब यहां के लिए आम बात हो गयी. जिले में औसतन रोज कहीं न कहीं दुर्घटनाएं होती रहती है. ससमय इलाज शुरु नहीं होने या फिर इलाज के अभाव में अक्सर गंभीर रूप से घायल लोगों की मौत भी हो जाती है. ऐसे और भी आपदाएं हैं,जो लोगों को प्रभावित/ नुकसान या फिर जीवन लीला समाप्त कर देती है.

क्या-क्या था प्रस्ताव.

जानकारी के मुताबिक मिलने के बाद ठनका

ठनका से बचाव के लिए सातों प्रखंडों में दर्जनों विद्यालयाें, सरकारी भवन तथा ऊंचे टावरों पर लाईटिनिंग एरेस्टर लगाने की योजना थी. सातों प्रखंडों दो सौ लाईटिनिंग एरेस्टर लगाया जाना था. 1 करोड़ रुपये की मांग की गयी थी. बताया जाता है कि लाईटिनिंग एरेस्टर लग जाने के बाद इसके आस-पास के करीब दो से ढाई सौ मीटर का क्षेत्र ठनका से पूरी तरह सुरक्षित हो जाते हैं. गौरतलब है कि ठनका की चपेट में आने से प्रत्येक साल दर्जन भर से अधिक लोगों की अकाल मौत हो जाती है. लेकिन लाईटिनिंग एरेस्टर लगने के बाद मौत का खेल थम जाएगा. इस अत्याधुनिक यंत्र का फायदा यह है कि अधिकतम ढ़ाई सौ मीटर क्षेत्र में गिरने वाले ठनका को खिंचकर जमीन के नीचे उतार देता है. वहीं मुंगेर रोड से महेशखूंट एनएच के आसपास ट्रामा सेंटर निर्माण की योजना है. ट्रामा सेंटर निर्माण पर तकरीबन 5 करोड़ रुपये खर्च पड़ेंगे. उल्लेखनीय है कि जिले में औसतन प्रतिदिन सड़क दुर्घटना होती है. जिले में एक भी ट्रामा सेंटर नहीं होने से सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों का ससमय/समुचित इलाज नहीं हो पाने की वजह से भी लोगों की मौत हो जाती है. इसके अलावा मास्टर प्लान में सदर प्रखण्ड के रहीमपुर दक्षिणी तथा अलौली प्रखंड के आनंदपुर मारन पंचायत में हाई लेवल रिसर्च सेंटर का निर्माण शामिल है. राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को डीएम ने प्रस्ताव भेजी है. इस पर दोनों जगहों पर रिसर्च सेंटर निर्माण में 12-12 करोड़ रुपये खर्च होंगे. हैलीपैड युक्त इन दोनों रिसर्च सेंटर पर सामान्य दिनों में ट्रेनिंग दिये जाएंगे, लेकिन बाढ़ के दिनों में इसकी उपयोगिता काफी बढ़ जायेगी. एक सेंटर पर 5 हजार बाढ़ प्रभावित लोग इमरजेंसी में शरण ले सकेंगे. राज्य स्तर पर भेजे गए 12 प्रस्ताव में मेडिकल,कीचेन,रैसक्यू वोट खरीद/निर्माण भी शामिल है. जानकारी के मुताबिक 7-7 मेडिकल तथा कीचेन वोट खरीदने की योजना है. दो-दो वोट हाई लेवल रिसर्च सेंटर से टैग रहेंगे, जबकि शेष 5-5 वोट अंचलों को मिलेंगे. कीचेन वोट की बात करें तो इस वोट पर 5 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था रहेगी.जो बाढ़ के दौरान पीड़ितों के लिए भोजन पहुंचाएगी,जबकि मेडिकल वोट के जरीये बाढ़/आपदा में फंसे लोगों का इलाज होगा. मेडिकल वोट पर मेडिकल टीम तैनात रहेगी. बता दें कि 12-12 लाख रुपये प्रत्येक मेडिकल/कीचेन वोट पर खर्च होने के अनुमान हैं. इसके अलावे 3.5 करोड़ की लागत से जिले के सातों अंचलों में एक-एक जागरुकता प्रशिक्षण केन्द्र खोलने की योजना है. यहां बाढ़ राहत- बचाव से संबंधित ट्रेनिंग दिये जाएंगे. सभी सेंटरों पर सामान्य के दिनों में ट्रेनिंग दी जाएगी. वहीं ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित जगहों पर “हॉस्पीटल ऑन वैन ” यानि वैन में हॉस्पिटल जैसी व्यवस्था की भी योजना है. ताकि दुर्घटना के शिकार घायलों का त्वरित इलाज किया जा सके. बताया जाता है कि हॉस्पिटल ऑन वैन में अस्पताल जैसी व्यवस्था रहेगी. इसमें डॉक्टर दूसरे नर्सिंग स्टॉफ, दवाईयां सहित सारी इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगे. इस वैन को ब्लैक स्पॉट के रुप में चिन्हित सतीश नगर, करुआ मोड़, संसारपुर, महेशखूंट व अलौली के क्षेत्र तैनात किया जाएगा. इस वैन का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना के साथ-साथ दूसरे आपदा/महामारी में भी मरीजों के इलाज के लिये किया जा सकेगा.बताया जाता है कि इस पांच वैन पर ढ़ाई करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसी तरह सदर अस्पताल को आग से पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए जाने का भी प्रस्ताव भी मास्टर प्लान में शामिल है. फायर सेफ्टी सिस्टम लग जाने के बाद अस्पताल आग से सुरक्षित हो जाएगा. उक्त सभी योजना के क्रियान्वयन के लिए राशि का इंतजार है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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