मानव शरीर से बड़े दुर्लभ है इस शरीर से ही ध्यान योग संभव है आचार्य स्वामी चतुरानंद महाराज बेलदौर. मानव जीवन बड़ा ही दुर्लभ है, 84 लाख योनियों में भटककर सत्कर्म से ही मानव जीवन मिलता है एवं इस शरीर से ही ध्यान योग संभव है उक्त बाते सोमवार को कुर्बन पंचायत के गैंधारसन गांव में आयोजित दो दिवसीय बिहार प्रांतीय संतमत सत्संग के 30 वे वार्षिक महाअधिवेशन के अंतिम पाली के सत्संग में आचार्य स्वामी चतुरानंद महाराज ने कही. इन्होंने सत्संग प्रेमियों को मोक्ष का सुगम मार्ग बताते कहा कि सभी जीवो में मानव शरीर सर्वश्रेष्ठ है 84 लाख जोनी में भटकने के बाद सत्कर्मों के प्रतिफल में मानव शरीर की प्राप्ति हुई है. लेकिन मानव संसार में आने के बाद अपने मूल उद्देश्य को भूल जाता है झूठ, चोरी,नशा, हिंसा, व्यविचार करने में लग जाता है माया मोह के चक्कर में पड़ जाता है और उन्हें फिर से 84 लाख योनि का चक्कर लगाना पड़ता है. आवागवन के चक्र से सदा के लिए मुक्ति पाने के लिए सत्संग जरूरी है. इन्होंने ध्यान योग के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने के गुढ़ रहस्य बताये. इसके अलावे इन्होंने महाभारत के दृष्टांत देते बर्बरीक का उदाहरण देकर बताऐ कि अकेला बर्बरीक ही पूरा महाभारत होता देखा भगवान ने जब बर्बरीक से पूछा महाभारत में कौन किसको मारा तो बर्बरीक ने जवाब देते हुए कहा कि पूरे महाभारत में सिर्फ कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलते दिखा कहने का तात्पर्य है कि आत्मज्ञान होने बाद सारे दुखों के बंधन से मुक्त हो जाएंगे और आप परमात्मा से मिल जाएंगे. वहीं उक्त सत्संग को सुनने को लेकर इलाके से काफी संख्या में सत्संग प्रेमी उमड़ पड़े. वहीं उक्त दो दिवसीय प्रांतीय महाधिवेशन के सफल आयोजन को लेकर आयोजन कमिटी के अध्यक्ष शिव मुखिया, कोषाध्यक्ष राजेंद्र मुखिया, हीरा चौधरी, भिखारी पटेल, नंदकिशोर राम, ललन मिस्त्री, भवानी सिंह, शंकर मुखिया, पूर्व मुखिया दिघौन राजो सहनी , अरुण राम, सुरेश चौधरी समेत दर्जनों ग्रामीण आवश्यक सहयोग में जुटे रहे.
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