सरकारी अमीन से जमीन की मापी कराना हुआ आसान

Updated at : 20 May 2024 11:58 PM (IST)
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जमीन की ई-मापी कराना अब आसान हो जायेगा. आगे जमीन की मापी के लिए राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है.

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खगड़िया. जमीन की ई-मापी कराना अब आसान हो जायेगा. आगे जमीन की मापी के लिए राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है. रैयत को ई नापी आवेदन के साथ एक शपथ पत्र देना होगा. इसी शपथ-पत्र के आधार पर सीओ के द्वारा भू-धारी की जमीन की मापी करायी जायेगी. बता दें कि पहले रैयत से प्राप्त जमीन मापी के आवेदन पर राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन की जरूरत पड़ती थी. इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही अंचल कार्यालय के द्वारा अमीन को जमीन की मापी करने के लिए भेजा जाता था. जानकार बताते हैं कि राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट आने में देरी के कारण मापी प्रक्रिया आरंभ नहीं हो पाती थी. रैयत/भू-धारी अनावश्यक कार्यालय का चक्कर लगाने को विवश हो जाते थे. इधर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी कर ई मापी में राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है. इस संदर्भ में विभाग के अपर सचिव अरुण कुमार सिंह ने डीएम को पत्र लिखा है. इस पत्र में कहा गया है कि मापी के लिए राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है. पत्र के साथ ई मापी आवेदन का एक प्रारूप भी शामिल किया गया है. यह शपथ पत्र है, जिसे ई मापी कराने को इच्छुक रैयत जमा करायेंगे. रैयत के शपथ-पत्र के आधार पर होगी मापी जमीन की ई मापी के लिये भू-धारी दो बिंदुओं पर शपथ पूर्वक कहेंगे कि जिस जमीन की मापी के लिए वे आवेदन कर रहे हैं, उस पर उनका स्वामित्व है. जमीन से जुड़ा कोई विवाद किसी न्यायालय में लंबित नहीं है. अगर मामले लंबित हैं और न्यायालय ने मापी का आदेश दिया है तो रैयत आदेश की प्रति आवेदन के साथ संलग्न करेंगे. शपथ पत्र में रैयत को यह भी लिखना होगा कि अगर भविष्य में उनके दावे गलत पाये गये तो वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं. बताया जाता है कि राज्य स्तर पर समीक्षा के दौरान यह बातें सामने आयी कि राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन में देरी के कारण जमीन के मापी से संबंधित ढेर सारे मामले अंचल कार्यालय में लंबित हैं. जिसके बाद विभाग ने राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन के बदले रैयत के शपथ पत्र के आधार पर जमीन की मापी कराने का निर्णय विभाग ने लिया है. 30 दिनों में आवेदन का होगा निष्पादन विभाग ने जमीन मापी के किसी आवेदन का अधिकतम 30 दिनों में निबटारे का आदेश पहले ही जारी कर दिया है. अंचलाधिकारियों को यह आदेश दिये गये हैं कि वे रैयत के शपथ पत्र के आधार पर मापी का निर्णय लेंगे. आवेदन को स्वीकृत करने के बाद अंचलाधिकारी संबंधित रैयत को मापी शुल्क जमा करने के लिए कहेंगे. उसके बाद मापी की तिथि निर्धारित कर इसे पूरा करेंगे.सीओ को यह भी निर्देश दिया गया है कि ई मापी की पूरी प्रक्रिया आनलाइन होगी. अगर कोई रैयत ऑफलाइन आवेदन करते भी हैं तो उसका निपटारा ऑनलाइन ही किया जायेगा. अतिक्रमण वाद निष्पादन करने के भी आदेश अंचल कार्यालयों में लंबित अतिक्रमण वाद से जुड़े मामले के त्वरित निष्पादन को लेकर राज्य स्तर से डीएम के माध्यम से सभी सीओ को आदेश दिये गये हैं. विभागीय स्तर पर समीक्षा के दाैरान अंचल कार्यालयों में बड़ी संख्यां में अतिक्रमण वाद के मामले लंबित पाए जाने के बाद आदेश जारी किये गये हैं.

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