बागमती पुल बनकर तैयार, संपर्क पथ के भूमि विवाद में फंसा आवागमन

Author Pravin Kumar|Edited by Shruti Kumari
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बाधित एप्रोच पथ व निर्मित पुल | Prabhat Khabar Network

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खगड़िया में बागमती नदी पर बना करोड़ों का पुल आवागमन के लिए तैयार है, लेकिन संपर्क पथ निर्माण में भूमि विवाद के कारण परियोजना अधर में लटकी है. इस देरी से लोगों को परेशानी हो रही है और गरीब परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है.

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खगड़िया : जिले में विकास की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल बागमती नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा पुल लगभग तैयार हो चुका है. लेकिन संपर्क पथ (एप्रोच रोड) के निर्माण में भूमि विवाद के कारण यह परियोजना अधर में लटक गई है. पुल तैयार होने के बावजूद लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. वहीं प्रस्तावित संपर्क पथ की जद में आने वाले गरीब, महादलित एवं अत्यंत पिछड़े परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा भी मंडराने लगा है.

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डीएम से जांच और समाधान की मांग

आनंदपुर मारण पंचायत के सामाजिक कार्यकर्ता अमन कुमार ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, भूमि विवाद का स्थायी समाधान निकालने तथा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की है.

भूमि विवाद में अटका संपर्क पथ

आवेदन के अनुसार आनंदपुर मारण पंचायत के हन्ना तिरासी एवं सुखासन गांव के बीच बागमती नदी पर बहुप्रतीक्षित पुल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है. लेकिन सुखासन गांव की ओर बनने वाला संपर्क पथ लंबे समय से भूमि विवाद के कारण रुका हुआ है. विभाग द्वारा प्रस्तावित वर्तमान एलाइनमेंट के अनुसार सड़क बनने पर कई गरीब परिवारों के मकान प्रभावित होंगे, जिससे दर्जनों परिवारों के सामने बेघर होने का संकट उत्पन्न हो गया है.

पुल बनने के बाद भी जोखिम उठाने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क पथ नहीं बनने के कारण पुल तैयार होने के बावजूद उन्हें आज भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है. बरसात और बाढ़ के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में नदी पार करने के दौरान कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.

बाढ़ से पहले समाधान नहीं हुआ तो बढ़ेंगी मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का मौसम शुरू हो चुका है. यदि जल्द संपर्क पथ का निर्माण नहीं हुआ तो पूरा इलाका पानी से घिर सकता है और जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होने की आशंका है. इसका सबसे अधिक असर मरीजों, स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दैनिक मजदूरों पर पड़ेगा. आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई है.

मुआवजा और पुनर्वास की मांग

प्रभावित परिवारों ने कहा है कि यदि वर्तमान एलाइनमेंट में बदलाव संभव नहीं है तो उन्हें बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए तथा जिन परिवारों के मकान प्रभावित होंगे, उनके पुनर्वास और आवास की समुचित सरकारी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. आवेदन में अपर समाहर्ता, संबंधित अंचलाधिकारी एवं तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम से स्थल जांच कराने की भी मांग की गई है.

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