बाढ़ का पानी उतरते ही मंडराने लगा महामारियों का खतरा: खगड़िया के सलारपुर में चौपाल लगाकर अधिकारियों ने दी चेतावनी
संध्या चौपाल में उपस्थित सीओ | Prabhat Khabar Network
बाढ़ का पानी उतरते ही खगड़िया जिले में बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है. सलारपुर गांव में अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर बाढ़ के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव के उपाय बताए. जानिए क्या हैं सावधानियां.
Parbatta Flood Disease Awareness: जब नदियां उफान पर होती हैं, तो बाढ़ का पानी घर-घर में तबाही की दास्तान लिखता है. लेकिन असली चुनौती तब शुरू होती है जब पानी धीरे-धीरे उतरने लगता है. बाढ़ का पानी पीछे छोड़ जाता है सड़ी-गली गंदगी, दूषित जल और खतरनाक बैक्टीरिया का वो अंबार, जो पल भर में महामारियों का रूप ले सकता है. खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित भरसो पंचायत के सालारपुर गांव में भी कुछ ऐसा ही डर पसरा हुआ है. इसी खौफ और संभावित बीमारियों की आहट के बीच सोमवार की शाम सलारपुर के वार्ड नंबर 15 में अधिकारियों और ग्रामीणों की एक चौपाल सजी. यह केवल एक बैठक नहीं थी, बल्कि बाढ़ के बाद जिंदगी को पटरी पर लाने और संक्रामक बीमारियों से जंग जीतने का एक सामूहिक संकल्प था.
बाढ़ के बाद क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खौफ
बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाली स्थितियां किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं होती हैं. जमा हुआ दूषित पानी, जलजमाव के कारण पनपते मच्छर और पीने के पानी के स्रोतों का दूषित होना हैजा, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों को न्योता देता है. सलारपुर गांव के निवासी हाल ही में बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं. ऐसे में अगर समय रहते सेहत और साफ-सफाई को लेकर कदम न उठाए जाएं, तो एक छोटी सी लापरवाही गांव के कई परिवारों को अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा सकती है. इसी जमीनी हकीकत को समझते हुए प्रशासन ने सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवाद कायम करने का फैसला किया.
शाम ढलते ही सजी चौपाल, अधिकारियों ने ग्रामीणों को दी जरूरी सीख
सोमवार की शाम जब सलारपुर वार्ड संख्या 15 में चौपाल की शुरुआत हुई, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी-अपनी बातें रखने पहुंचे. इस संध्या चौपाल में अंचल अधिकारी हरिनाथ राम और प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार पंडित खुद मौजूद रहे. अधिकारियों ने ग्रामीणों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद किस तरह की सावधानियां बरतनी जरूरी हैं. उन्होंने साफ कहा कि इस समय उबला हुआ या ब्लीचिंग पाउडर युक्त साफ पानी ही पीएं. बासी खाना खाने से बचें और अपने घर के आसपास किसी भी हाल में गंदा पानी जमा न होने दें.
जन-प्रतिनिधियों ने मिलाया हाथ, स्वास्थ्य सतर्कता पर जोर
इस चौपाल का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जन-प्रतिनिधि भी ग्रामीणों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए. जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव और पूर्व पंचायत समिति सदस्य विजय यादव ने भी चौपाल में पहुंचकर लोगों का हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में हर एक ग्रामीण का खुद सतर्क होना बेहद जरूरी है. अगर परिवार के किसी भी सदस्य को उल्टी, दस्त, बुखार या कमजोरी महसूस होती है, तो बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से सलाह लें.
Parbatta Flood Disease Awareness: प्रशासनिक जवाबदेही और आगे की राह
चौपाल के दौरान अधिकारियों ने साफ किया कि बाढ़ के बाद बीमारियों से बचाव का सबसे असरदार माध्यम केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही है. अंचल अधिकारी हरिनाथ राम और बीडीओ संतोष कुमार पंडित ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि प्रशासन हर स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. गांव में फॉगिंग, ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव और जरूरत पड़ने पर मेडिकल कैंपों के आयोजन को लेकर भी पहल की जा रही है. अधिकारियों ने अपील की है कि ग्रामीण आपस में मिलकर साफ-सफाई अभियान चलाएं ताकि सालारपुर गांव को किसी भी संभावित महामारी की चपेट में आने से पूरी तरह बचाया जा सके.
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