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तीन माह बाद भी आशा कार्यकर्ता हत्या की नहीं सुलझी गुत्थी, बनकर रह गयी पहेली

Updated at : 09 Nov 2025 10:07 PM (IST)
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तीन माह बाद भी आशा कार्यकर्ता हत्या की नहीं सुलझी गुत्थी, बनकर रह गयी पहेली

आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा हत्या का तीन माह बीत चुका है. अब तक पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझा नहीं पायी है. गोगरी पुलिस के अब तक हाथ खाली है, पुलिस यह भी पता नहीं कर पायी है कि हत्या कौन किया और कैसे हुआ.

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पूनम हत्याकांड. घर में खून से लथपथ मिला था शव, पुलिस की कार्यशैली पर उठा रही सवाल

घटना बीते 6 सितंबर को आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा की गला काटकर की गयी थी हत्या

गोगरी. आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा हत्या का तीन माह बीत चुका है. अब तक पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझा नहीं पायी है. गोगरी पुलिस के अब तक हाथ खाली है, पुलिस यह भी पता नहीं कर पायी है कि हत्या कौन किया और कैसे हुआ. लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह सिर्फ कहावत बन कर रह गया है.

मालूम हो कि थाना क्षेत्र के मुश्कीपुर कोठी निवासी अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा हत्याकांड में पुलिस को अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है. मृतका के हत्यारे का भी अब तक सुराग नहीं लग पाया है. शंका है कि हत्याकांड को अंजाम मृतका के परिजन और उनके घर काम करने वाली दाई के परिवार वाले ने ही मिलकर दिया है. इस घटना के बाद पुलिस कुछ दिन तक तो काफी कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर अब केस की फाइल को बंद कर दिया गया है.

अंधेरे में तीर चला रही पुलिस

थाना क्षेत्र के मुश्कीपुर कोठी में आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में बड़े-बड़े दावे करने वाली पुलिस खुद उलझ गयी है. हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में लगायी गयी पुलिस टीम 90 दिनों से हाथ मल रही हैं. पुलिस सुराग की तलाश में टीम अंधेरे में ही तीर चला रही हैं. पुलिस अब तक यही पता नहीं लगा सकी है कि हत्या किसने की थी और इसके पीछे वजह क्या थी. कातिलों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का खोखला दावा कर रही है.

घर में काम करने वाली दाई व उसके पुत्र की भूमिका संदिग्ध

बताया जाता है कि आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा घर के अन्दर निजी क्लिनिक चलाती थी और उसमें गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने का काम करती थी. जिसमें मुश्कीपुर कोठी निवासी शांति देवी उनके साथ काम करती थी. इधर, पूछताछ में शांति देवी ने पुलिस को बताया था कि पहले पूनम वर्मा उन्हें 250 रुपये देती थी और बाद में 50 रुपये बढ़ाकर 300 कर दिया. शांति देवी ने बताया कि घटना के दिन सुबह में पूनम ने एक गर्भवती महिला का प्रसव कराया था और फिर घर सफाई कराकर उन्हें घर भेज दी. उस वक्त घर में कोई नहीं था, सिर्फ पूनम ही थी. घटना को लेकर पुलिस ने पूनम वर्मा के पुत्र शशि किशोर, दाई शांति देवी, मिथुन कुमार और पड़ोसी सुचन कुमार को पूछताछ के लिए थाना बुलाया था. बताया जाता है कि पुलिस ने तीनों व्यक्ति से घटना के बारे में एक-एक कर पूछताछ किया तो सभी ने अलग-अलग बयान दिया. इतना ही नहीं मृतका के पुत्र शशि किशोर से पूछताछ किया तो उसके चेहरे से पसीना निकलने लगा और उसने घटना के दिन सुबह में दिलखुश कुमार, आर्यन कुमार और अन्य लोगों के साथ बगीचा में होने की बात बताया. ऐसे में दाई शांति कुमारी, पुत्र मिथुन कुमार की भूमिका हत्या मामले में अबतक काफी संदिग्ध मानी जा रही है.

घर के अदंर खून से लथपथ मिला था शव

आशा पूनम वर्मा का शव उसके घर में खून से लथपथ मिला था, जिसमें गला और स्तन पर किसी धारदार हथियार से वार किए जाने के निशान थे. घटना के बाद पुलिस ने जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन माह बाद भी मामला अनसुलझा है. आसपास के ग्रामीणों के अनुसार पूनम वर्मा अपने घर में अकेली अपने एक पुत्र के साथ रहती थीं. पति की मृत्यु के बाद वह अपने घर मुश्कीपुर कोठी में अपने घर पर क्लिनिक चलाकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराती थी और अपना जीवनयापन करती थी. घटना वाली सुबह जब वह घर से बाहर नहीं निकलीं, तो पड़ोसियों और पुत्र ने घर में झांककर देखा तो पूनम वर्मा का खून से सना शव देखकर इलाके में दहशत फैल गयी. पुलिस ने मौके से कुछ साक्ष्य जुटाने की बात कही थी, लेकिन न तो कोई संदिग्ध हिरासत में लिया गया और न ही हत्या का कोई ठोस कारण सामने आया.

जांच जारी है का सिर्फ मिलता है जवाब

परिजन और ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को शुरुआत से ही गंभीरता से नहीं लिया. प्रारंभिक जांच के बाद मामले की फाइल दबा दी. अब स्थिति यह है कि कोई भी अधिकारी इस मामले पर बात करने से बचता है. पूछने पर केवल जांच जारी है का जवाब मिलता है, लेकिन जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती. लोगों का कहना है कि यदि यह घटना किसी प्रभावशाली व्यक्ति के परिवार में हुई होती, तो हत्यारे अब तक पकड़े जा चुके होते. तीन माह बीतने के बाद भी न्याय न मिलने से ग्रामीणों में पुलिस के प्रति असंतोष लगातार बढ़ रहा है.

सुनियोजित ढंग से किया गया था हत्या

बताया जाता है कि घटना के दिन पुलिस ने मृतका के परिजन का मोबाइल जब्त कर लिया था. घटनास्थल व इसके आसपास लगे सीसीटीवी फुटेजों को खंगाला गया था. डॉग स्क्वॉयड की टीम भी पहुंची थी और कई साक्ष्य संग्रह कर जांच के लिए अपने साथ ले गयी थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार हर एंगल से जांच कर रही है, लेकिन सफलता से कोसों दूर है. मृतका पूनम वर्मा के हत्या जैसी जघन्य वारदात के आरोपितों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. लोगों का कहना है कि घटना को लेकर पुलिस गंभीर नही दिख रही है. जिसे देखते हुए उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है. घटनास्थल पर मिले खून के छींटे और कमरे की स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी. जिसे बाद में दीवार में खून के छींटे लगाकर दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया. पुलिस का कहना है कि कई दिशाओं में जांच कर रही है. जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

कहते हैं प्रशिक्षु डीएसपी

प्रशिक्षु डीएसपी सह थानाध्यक्ष तरूण कुमार पांडे ने बताया कि हत्या मामले में अनुसंधान जारी है. जल्द ही मामले का उद्भेदन कर दिया जायेगा.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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