पांच वर्ष बाद फिर हुई शिशवा बरेठा में जनप्रतिनिधि की हत्या

Updated at : 09 Apr 2017 4:45 AM (IST)
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पांच वर्ष बाद फिर हुई शिशवा बरेठा में जनप्रतिनिधि की हत्या

पूर्व में भी शिशवा के प्रखंड प्रमुख के देवर का हुआ था हत्या पसराहा में भी हो चुकी है कई दिग्गज जनप्रतिनिधि की हत्या गोगरी : जिले में गोगरी अनुमंडल की एक अलग राजनीतिक पहचान है. मुख्यतः उत्तर दिशा से कोसी नदी एवं दक्षिण दिशा से गंगा नदी के बीच बसा हुआ है खगड़िया और […]

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पूर्व में भी शिशवा के प्रखंड प्रमुख के देवर का हुआ था हत्या

पसराहा में भी हो चुकी है कई दिग्गज जनप्रतिनिधि की हत्या
गोगरी : जिले में गोगरी अनुमंडल की एक अलग राजनीतिक पहचान है. मुख्यतः उत्तर दिशा से कोसी नदी एवं दक्षिण दिशा से गंगा नदी के बीच बसा हुआ है खगड़िया और गोगरी. इस क्षेत्र में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं जो कि प्रसिद्ध हैं. लेकिन बीते कुछ दिनों से लगातार जन प्रतिनिधियों की हो रही हत्या से गोगरी अनुमंडल चर्चा का विषय बना हुआ है. बीते कुछ दशकों से यहां आपसी रंजिश, प्यार-मोहब्बत, दबंगई, पारिवारिक लड़ाई एवं जमीनी विवाद में कई हत्याएं हो चुकी है. उन हत्याकांड के हत्यारों की खोज प्रशासन द्वारा अभी भी जारी है. यहां की आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का भी विश्वास डगमगाने लगा है.
क्योंकि बीते पांच वर्षों में कई जनप्रतिनिधियों की हत्या हो चुकी है. वो भी गोगरी अनुमंडल क्षेत्र में बीते तीन मई 2012 को गोगरी प्रखंड के प्रखंड प्रमुख रीमा देवी के देवर शिशवा निवासी जवाहर यादव का अपराधियों ने वर्चस्व और जमीनी विवाद को लेकर गोली मारकर हत्या कर दिया था. वहीं, गोगरी थाना क्षेत्र के ही रामपुर निवासी और जदयू के बाहुबली नेता उपेन्द्र गोप की हत्या 16 सितम्बर 2014 के बाद से गोगरी प्रखंड और अनुमंडल क्षेत्र में हत्याओं के सिलसिला बढ़ गया है. उसके बाद पसराहा के वर्तमान उप मुखिया शम्भू सिंह का 19 फरवरी 2015 को जमालपुर बाजार में दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दिया गया था. फिर 25 अगस्त 2015 को शाम के सात बजे पसराहा के ही पूर्व मुखिया रंजित सिंह की गोली मारकर हत्या कर दिया गया था. उसके बाद पसराहा के ही दिग्गज बबलू वर्मा को अपराधियों नें गोली मार दी थी. कारण था मुखिया का चुनाव लड़ना. अपराधियों ने चुनाव लड़ने की सजा देवघर में 1 मार्च 2017 को गोगरी के पूर्व प्रमुख पूनम वर्मा के पति राजकिशोर वर्मा उर्फ़ बबलू वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दिया गया था. वहीं, बीते शुक्रवार को पूर्व सरपंच पति देवो यादव के हत्या के बाद में प्रशासन के विरुद्ध जनप्रतिनिधि में आक्रोश पनपने लगा है. इसमें कई ऐसी हत्याएं शामिल हैं, जिसकी गुत्थी अभी तक अनसुलझी है. किसानों की हत्या, जनप्रतिनिधि की हत्यारों की खोज के साथ-साथ अज्ञात महिलाओं के शव की शिनाख्त भी नहीं हो पाई है. अब प्रश्न यह है कि आखिर गोगरी पुलिस में खुफिया तंत्र क्या काम कर रहा है? अपराधियों को अवैध हथियार कहां से प्राप्त हो रहे है? हत्या करने के बाद फरार होने में भी कामयाब हो जाते है. आखिर गोगरी की रात्रि गश्ती की टीम क्या करती है?
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