मिट्टी की खातिर मौत बन गयी चार जिंदगी
Updated at : 07 Apr 2017 9:02 AM (IST)
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गोगरी : बेलदौर थाना क्षेत्र के में गुरुवार को धंसना में दब कर लोगों के मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी अलौली सहित अन्य इलाकों में इस तरह की वारदात सामने आ चुकी है. लेकिन ना तो जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया और ना ही लोग मानने को […]
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गोगरी : बेलदौर थाना क्षेत्र के में गुरुवार को धंसना में दब कर लोगों के मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी अलौली सहित अन्य इलाकों में इस तरह की वारदात सामने आ चुकी है. लेकिन ना तो जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया और ना ही लोग मानने को तैयार हैं. लिहाजा जिंदगी के मौत में बदलने का सिलसिला जारी है. गुरुवार को भी बेलदौर में हुए दर्दनाक हादसे में तीन किशोरी व एक विवाहिता की मौत हो गयी. बताया जाता है कि खतरे मोल लेकर मिट्टी निकालना आज भी ग्रामीण इलाकों में आम बात है.
पूर्व में भी जहां दो लोगों के दबने के बाद गुरुवार की सुबह फिर उसी स्थान पर कई लोग मिट्टी निकालने पहुंच गए. हालांकि कई बार स्थानीय पुलिस ने मौके पर जाकर उन्हें भगा दिया करते थे और निगरानी के लिए गार्ड तैनात कराया गया था, जिससे लोग वहां से मिट्टी निकालने का जोखिम न उठाएं. लेकिन गुरुवार की घटना ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है. बेलदौर,अलौली में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने इन्हीं मिट्टी की खदानों में अपने बीबी और बच्चों को दफन होते देखा है. इन खदानों से निकाली गई मिट्टी को वे गांव और बाजार में बेचते हैं. यहां तक की मिट्टी ट्रकों के माध्यम से पड़ोस के गांवों में भी भेजा जाता है. जिससे मिले रुपयों से गरीबों का पेट पलता है. पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो मिट्टी धंसने से एक दर्जन से ज्यादा मौत हो चुकी हैं.
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