अवैध तरीके से बिक रही है बांध की जमीन

Updated at : 07 Apr 2017 9:00 AM (IST)
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अवैध तरीके से बिक रही है बांध की जमीन

रिंग बांध के हिस्सों को निबंधित केवाला के माध्यम से बेचना शुरू कर दिया गया है. अकहा-खजरैठा रिंग बांध से अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कई बार प्रयास किया. परबत्ता : प्रखंड के सौढ दक्षिणी पंचायत अंतर्गत मथुरापुर गांव के निकट गोगरी नारायणपुर तटबंध का बीते कई वर्षों से अतिक्रमण हो […]

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रिंग बांध के हिस्सों को निबंधित केवाला के माध्यम से बेचना शुरू कर दिया गया है. अकहा-खजरैठा रिंग बांध से अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कई बार प्रयास किया.

परबत्ता : प्रखंड के सौढ दक्षिणी पंचायत अंतर्गत मथुरापुर गांव के निकट गोगरी नारायणपुर तटबंध का बीते कई वर्षों से अतिक्रमण हो रहा है. अब बीते कुछ महीनों में अतिक्रमणकारियों का साहस इतना बढ़ गया है कि बीते पांच दशक पूर्व खजरैठा, मथुरापुर तथा लौनियाचक गांवों को गंगा नदी के बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए बनाये गये रिंग बांध के हिस्सों को निबंधित केवाला के माध्यम से बेचना शुरू कर दिया है.

क्या है मामला : प्रखंड के सौढ दक्षिणी पंचायत के मथुरापुर निवासी अभय कुमार ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष आवेदन देकर मथुरापुर नयावास के नागेश्वर साह, दिगंबर साह व शंकर साह पर जालसाजी व षड़यंत्र के तहत राजस्व विभाग के पदाधिकारी की मिलीभगत से सरकारी रिंग बांध की जमीन बेचने का आरोप लगाया था. आरोपियों ने गांव के शिव शंकर चौधरी की पत्नी सुमित्रा देवी को मथुरापुर थाना नंबर 7, खाता 120, खेसरा 269 के 08 कट्ठा 15 धुर 10 धुरकी जमीन को अवैध तरीके से किये गये केवाला के माध्यम से बेच दिया. इतना ही नहीं इस केवाला में गलत तरीके से चौहद्दी व रकवा का वर्णन करने का भी आरोप लगाया गया है.

साबित है आरोप : प्रशासन भी इस मामले में वादी के द्वारा लगाये गये आरोपों को सत्य मानता है.

इस परिवाद की सुनवाई के दौरान बीते 28 दिसंबर 16 को सीओ परबत्ता के द्वारा बताया गया कि प्रतिवादी द्वारा आम रास्ते के उपयोग हो रहे रिंग बांध का अतिक्रमण किया गया है तथा अवैध रूप से रास्ते पर चौकी व खूंटा गाड़ कर व्यवधान उत्पन्न किया गया है. इसके अलावा इस बारे में परबत्ता के सीओ ने पत्रांक 1545 दिनांक 25 अक्तूबर 2016 द्वारा प्रतिवेदित किया कि विक्रेता के जमाबंदी में दर्ज रकवा से अधिक भूमि की बिक्री की गयी है तथा अंचल अमीन से खेसरा के भौतिक सत्यापन के उपरांत मामले का निष्पादन किया जा सकता है.

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