बाढ़ ने बदल दिया माधवपुर की सूरत, पटरी पर नहीं लौट सकी है जिंदगी

Published at :11 Sep 2016 12:00 AM (IST)
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बाढ़ ने बदल दिया माधवपुर की सूरत, पटरी पर नहीं लौट सकी है जिंदगी

बाढ़ ने बदल दिया माधवपुर की सूरत, पटरी पर नहीं लौट सकी है जिंदगीफोटो. 9 मेंकैप्सन. मिट्टी का बैग डालकर किया गया सड़क चालूप्रतिनिधि4परबत्ता. प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से अब बाढ़ का पानी उतर चुका है. इसके साथ ही बाढ़ के दौरान हुए नुकसान का दृश्य भी अब साफ होने लगा है. सैकड़ों घरों में […]

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बाढ़ ने बदल दिया माधवपुर की सूरत, पटरी पर नहीं लौट सकी है जिंदगीफोटो. 9 मेंकैप्सन. मिट्टी का बैग डालकर किया गया सड़क चालूप्रतिनिधि4परबत्ता. प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से अब बाढ़ का पानी उतर चुका है. इसके साथ ही बाढ़ के दौरान हुए नुकसान का दृश्य भी अब साफ होने लगा है. सैकड़ों घरों में दरारें आ गयी है.दर्जनों घर गिर कर बर्बाद हो गये हैं.अभी भी दर्जनों घरों को पानी ने चारों तरफ से घेर रखा है.बदल गयी माधवपुर की सूरतइस बाढ़ ने माधवपुर पंचायत की सूरत को बदलकर रख दिया. इस पंचायत के तीनों गांवों माधवपुर,विष्णुपुर तथा मुरादपुर में सैकड़ों घरों में दरारें पड़ गयी है. वहीं सैंकड़ों कच्चे व फूस के घर गिर कर बर्बाद हो चुके हैं.अधिकांश लोगों के शौचालयों ने काम करना बंद कर दिया है.लगातार तीन सप्ताह तक जल संग्रहण रहने के कारण इलाके की सभी फसलें खेत में ही सड़ गयी.इस सड़े हुए पौधों की दुर्गंध ने अब भी लोगों का जीना दूभर कर रखा है.बर्बाद हो गयी सड़केंइस बार के बाढ़ ने माधवपुर पंचायत की सड़कों को बर्बाद कर दिया. रिंग बांध से मुरादपुर जाने वाली सड़क में बाढ़ के उतरते पानी ने लगभग पचास फीट चौड़ा कटिंग बना डाला. वहीं इस सड़क को लगभग एक किलोमीटर लंबाई में खराब कर दिया. इस सड़क में पूर्व से जल निकासी के लिये ह्यूम पाइप का छोटा पुलिया बना हुआ था. लेकिन लौटते पानी के दबाव ने आगे इस पुलिया को तहस नहस कर दिया. बाढ़ के लौटने के बाद मुरादपुर की सड़क पैदल चलने के लायक भी नहीं रही थी. लेकिन दो दिन पूर्व पंचायत समिति प्रमुख धनंजय सिंह उर्फ मोदी तथा जिला परिषद सदस्य ग्यासुद्दीन के व्यक्तिगत प्रयास से इस कटिंग को पाट कर किसी प्रकार इस सड़क को चालू किया गया.लौटने लगे पशुपालकबाढ़ प्रभावित पंचायतों में बाढ़ आने के साथ ही पशुपालकों ने इलाके से पलायन कर दिया था. अब ये पशुपालक धीरे धीरे अपने घरों को लौटने लगे हैं. हालांकि पशुपालकों को अभी भी चारा एवं भूसा की व्यवस्था करने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.लेकिन विगत दो सप्ताह से एनएच 31 पर खुले आसमान के नीचे रह रहे पशुपालकों के पास अन्य कोई विकल्प भी नहीं बचा था.चारे की है घोर किल्लतप्रखंड के बाढ़ प्रभावित पंचायतों में पशु चारा की घोर किल्लत हो गयी है. माधवपुर, कवेला, लगार, भरसो तथा कुल्हरिया पंचायतों के बाढ प्रभावित गांवों में अधिकांश पशुपालकों का भूसा घर बाढ़ के पानी में डूब गया. इसके साथ ही सभी खेतों का हरा चारा भी सड़ गल गया. अब पशुपालकों को कई गुणा अधिक कीमत पर बांध के बाहर स्थित हरा चारा खरीदने पर विवश होना पड़ रहा है.चालू हुआ मोबाइल टॉवरप्रखंड में बाढ़ के आने के साथ माधवपुर पंचायत में लगाये गये सभी टॉवर पानी में डूब गये.इसके साथ ही इन सभी टॉवरों ने काम करना बंद कर दिया था.अब सभी टॉवरों को चालू कर दिया गया है.

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