जलस्तर घटने के बाद घर से निकला पानी.
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Aug 2016 3:40 AM (IST)
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पानी घटने के साथ ही दिखने लगी तबाही गोगरी : पानी घटने के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में गंगा की तबाही का मंजर अब साफ नजर आ रहा है. बाढ़ से कितनों के घर तबाह हुए , कितनों के सपने. राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पानी घटने के साथ अब वापस घर लौटने […]
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पानी घटने के साथ ही दिखने लगी तबाही
गोगरी : पानी घटने के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में गंगा की तबाही का मंजर अब साफ नजर आ रहा है. बाढ़ से कितनों के घर तबाह हुए , कितनों के सपने. राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पानी घटने के साथ अब वापस घर लौटने की अब जल्दी है. गंगा की उफनाती लहरें तो अब धीरे-धीरे शांत हो रही हैं, लेकिन तबाही का मंजर देखकर दिल दहल जाता है.नदी के उस पार को तकती आंखें, दूर से अपने मिट चुके आशियाने की हालत जानने की बेचैनी और चेहरे पर मायूसी इस विभीषिका की कहानी कह रही थीं. सीओ चंदन सिंह ने बताया कि आयोग ने सत्रह अगस्त को ही आगाह कर दिया था, जब गंगा वॉर्निंग लेवल को छू रही थी, उसके बाद लगातार जलस्तर बढ़ता रहा
. 20 अगस्त को बारह बजे दिन में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया तो चिंता बढ़ गयी.तब तक गंगा ने जहां तहां रिंग तटबंध तोड़ दिया और तटीय इलाके पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गये. 21 अगस्त को गंगा ने 1994 का रिकॉर्ड तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया.एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू आपरेशन में लगी रहीं, लेकिन कुछ लोग ऐसे थे जिन तक टीमें नहीं पहुंच पाईं और लोग खुद ही जुगत लगाई और अपनी जान की सुरक्षा की. परिवार के मुखिया अवध राय ने बताया कि रात में सभी सो रहे थे कि अचानक गांव में हल्ला हुआ कि गंगा का पानी गांव में घुस रहा है, सुनकर कुछ समझ नहीं आया करें क्या? घर में पानी का घुसना देखते रहे और किसी तरह रात बितायी. जब पौ फटी तो बच्चों को लेकर भुड़िया घाट पर आ गये. अब कुछ दिनों से यही हमारा जीवन है. लहरों के बीच रह रहे हैं पानी कम होगा, गांव जाकर देखेंगे क्या हाल है? कितना नुकसान हुआ है? वहीं मंगलवार को तारा मध्य विद्यालय गोगरी में लोग अपने मवेशियों का चारा लेने के लिए लाइन में लगे थे. चेहरे पर उदासी थी. लोगों ने बताया कि बाढ़ ने सबकुछ छीन लिया. किसी को अगले लगन में अपनी बेटी की शादी करनी है तो किसी को जनेऊ करना है, लेकिन अब यह संभव शायद हो सके कि निश्चित तारीख को यह होगा, क्योंकि गांव में कुछ बचा नहीं है सब गंगा मैया लील गयी हैं अब कैसे क्या होगा?
लोगों ने बताया कि खाने के लिए सरकार की तरफ से चूड़ा-गुड़ मिला है, राहत केंद्रों में खाना भी मिल रहा है, मवेशियों को भी चारा दिया जा रहा है. गंगा की लहरों के बीच नाव पर बने आशियाने में महिलाएं, उनकी समस्या दिखी. उन्हें शौच की समस्या और खुले में गंगा के पानी में नहाना पड़ रहा है.
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