जिले में बिना निबंधन के चल रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थान

Updated at : 10 Aug 2017 4:27 AM (IST)
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जिले में बिना निबंधन के चल रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थान

खगड़िया : जिला मुख्यालय सहित गोगरी के अलावा अन्य प्रखंडों में अब भी बिना निबंधन के कोचिंग संस्थान चल रहे हैं. कोचिंग संचालकों को ना कानून का डर है और ना नियमों की परवाह. अपनी जेब भरने के लिए ये सरकार को तो चूना लगा ही रहे हैं साथ ही छात्र-छात्राओं को कोर्स पूरा कराने […]

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खगड़िया : जिला मुख्यालय सहित गोगरी के अलावा अन्य प्रखंडों में अब भी बिना निबंधन के कोचिंग संस्थान चल रहे हैं. कोचिंग संचालकों को ना कानून का डर है और ना नियमों की परवाह. अपनी जेब भरने के लिए ये सरकार को तो चूना लगा ही रहे हैं साथ ही छात्र-छात्राओं को कोर्स पूरा कराने के नाम पर काफी राशि की फीस भी ले रहे हैं. जिले में रह कर इंटर की पढ़ाई करने वाले छात्र मजबूरी में उनके मनमाने फीस भरने को मजबूर हैं.

राज्य सरकार का सख्त निर्देश है कि बिना निबंधन के चल रहे कोचिंग संस्थानों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाय. जानकारी के अनुसार जिले में मात्र एक-दो ही कोचिंग संस्थान है जिन्होंने अपना निबंधन कराया है. बाकी के सभी बिना निबंधन के ही चल रहे हैं. ऐसे कोचिंग संस्थानों की संख्या जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग तीन हजार के आस पास होगी. तीन हजार कोचिंग संचालक सरकार को कितना चूना लगा रहे हैं. इसका अंदाजा जिला प्रशासन को नहीं है.
जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही से ही ऐसे कोचिंग चल रहे हैं. क्योंकि विगत चुनाव के पूर्व डीएम व एसपी ने शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर बिना निबंधन के चल रहे कोचिंग संस्थानों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. लेकिन शिक्षा विभाग आज तक कोई कार्रवाई नहीं कर सका. इसका परिणाम है कि वर्ष 2016 में मैट्रिक की परीक्षा पास कर इंटर में विज्ञान संकाय में नामांकन लेने वाले छात्र-छात्राओं का इन अवैध कोचिंग संचालकों ने आर्थिक शोषण किया है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ छात्रों ने दो चार कोचिंग संचालकों का नाम लेकर बताया कि इनके द्वारा भौतिकी के एक साल का कोर्स पूरा कराने के लिए आठ से दस हजार, रसायन शास्त्र का एक वर्ष का कोर्स पूरा कराने के लिए आठ से दस हजार व गणित विषय का कोर्स पूरा कराने के लिए दस से 12 हजार रुपया फीस ले रहे हैं. इतने खर्च को देख अभिभावक भी अनुमान लगा रहे हैं कि इतने खर्च में बाहर के एक ही कोचिंग संस्थान में तीनों विषयों की पढ़ाई हो जायेगी. ऐसे में जिले में शैक्षणिक स्तर में भी काफी गिरावट इन अवैध कोचिंग संचालकों के कारण आ रही है. लेकिन इस पर जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है.
निजी कोचिंग संस्थानों को निबंधन कराना अनिवार्य है. जल्द ही बिना निबंधन वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अभियान चला कर जांच व कार्रवाई की जायेगी.
सुरेश साहु, शिक्षा पदाधिकारी
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