बनने के साथ टूटने लगी सड़कें

Updated at : 25 Jul 2017 5:34 AM (IST)
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बनने के साथ टूटने लगी सड़कें

अनदेखी. भ्रष्टाचार के चंगुल में कराह रही सड़क निर्माण योजना इंजीनियरों, अधिकारियों व संवेदक की मिलीभगत से खगड़िया में चल रही सड़क निर्माण की योजनाओं में भ्रष्टाचार हावी हो गया है. एसी में बैठकर एमबी बुक करने वाले इंजीनियरों को स्थलीय निरीक्षण की फुरसत नहीं है. खगड़िया : सरकार सड़क निर्माण के लिये करोड़ों की […]

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अनदेखी. भ्रष्टाचार के चंगुल में कराह रही सड़क निर्माण योजना

इंजीनियरों, अधिकारियों व संवेदक की मिलीभगत से खगड़िया में चल रही सड़क निर्माण की योजनाओं में भ्रष्टाचार हावी हो गया है. एसी में बैठकर एमबी बुक करने वाले इंजीनियरों को स्थलीय निरीक्षण की फुरसत नहीं है.
खगड़िया : सरकार सड़क निर्माण के लिये करोड़ों की राशि देती है, लेकिन विभागीय इंजीनियरों की मिलीभगत से सरकारी राशि का गोलमाल कर लिया जाता है. लिहाजा, घटिया सड़क निर्माण के कारण निर्माण के साथ ही यह टूटने लगती है. विभागीय नियम के मुताबिक एक सड़क बनने के बाद कम से कम पांच वर्ष तक चलना चाहिये लेकिन खगड़िया में आलम यह है कि सड़क बनी नहीं कि टूटनी शुरु हो जाती है. कई योजनाओं का आलम यह है कि अधिकांश राशि निकासी के बाद भी सड़क निर्माण अधूरा छोड़ ठेकेदार मौज करते रहते हैं
और विभागीय अधिकारी बेखबर बने रहते हैं. सूत्रों की मानें तो एसी में बैठकर एमबी बुक करने सहित पीसी के खेल में सड़क निर्माण की योजनाओं का बंटाधार हो रहा है. हालांकि विभागीय अधिकारी इसे सिरे से नकारते हुए कहते हैं कि सड़क निर्माण योजना में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में कोई देरी नहीं की जाती है. इधर, हाल के दिनों में करोड़ों की सड़क निर्माण की योजनाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के बाद भी बरसों तक विभागीय अधिकारी के कानों पर जू तक नहीं रेंगना कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने के लिये काफी है.
बेलदौर प्रखंड के तेलिहार गांव में करीब 20 महीने पूर्व स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन की योजना से करीब 10 लाख की लागत से सड़क निर्माण करवाया गया. लेकिन बनने के साथ ही सड़क टूटने लगी. जगह जगह बने गड्ढे योजना में भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं. पूरे मामले की शिकायत जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में किये जाने के बाद भ्रष्टाचार पर से परदा हटा. पूरे मामले में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता,
अभिकर्ता सह सहायक अभियंता मनोज कुमार, बिना स्थलीय निरीक्षण के एमबी बुक करने वाले कनीय अभियंता विनोद कुमार की भूमिका सवालों के घेरे में आने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होना यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी हो चुकी हैं. इधर, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने गड़बड़ी में शामिल अभियंताओं पर कार्रवाई का निर्देश दिया है. लेकिन अधिकारी बचाने में लगे हैं. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने भी माना है कि विभागीय अभियंताओं की मिलीभगत से तेलिहार में सड़क निर्माण में गड़बड़ी की गयी है.
करीब 14 करोड़ की लागत से नवादा घाट से धमारा घाट तक की 11 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना वर्ष 2012-13 में ही पूरा करने का लक्ष्य था. लेकिन करीब 80 फीसदी राशि निकासी के बाद भी काम अब तक आधा भी पूरा नहीं हुआ है. संवेदक पर आरोप है कि उसने विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत करके सड़क निर्माण की अधिकांश राशि निकासी कर ली है. नवादा घाट से धमहरा घाट सड़क निर्माण के संवेदक राजा कंस्ट्रकशन के प्रोजेक्ट मैनेजर अरविन्द सिंह हैं.
बीते दिनों सड़क निर्माण में देरी को लेकर आक्रोशित लोगों ने संवेदक की पिटाई कर दी थी. इस दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता सहित अन्य अभियंताओं को छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी थी. पूरे मामले में जिला परिषद उपाध्यक्ष मिथिलेश यादव के नेतृत्व में रेल चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन तक हो चुका है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विभागीय अधिकारी इतने दिनों से कहां सोये हुए थे. जिसके कारण पांच बरस बीतने के बाद भी राशि निकासी के बावजूद सड़क निर्माण नहीं किया गया.
आखिर बिना स्थलीय निरीक्षण के एमबी कैसे बुक हो गया? करोड़ों की राशि निकल गयी लेकिन निर्माण नहीं हुआ तो विभाग ने संवेदक पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया?
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. तेलिहार में 20 महीने पहले बनी सड़क का टूटना निर्माण कार्य में गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है. पूरे मामले में खगड़िया डीएम को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया जायेगा.
प्रो चन्द्रशेखर, प्रभारी मंत्री खगड़िया.
तेलिहार में 20 महीने पूर्व बनायी गयी सड़क जर्जर होने के मामले में विभागीय अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. साथ ही जर्जर सड़क के मरम्मति के आदेश दिये गये हैं.
उमेश प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन.
जिले की विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार के कारण धरातल पर स्थिति बहुत डरावनी होती जा रही है. सरकारी राशि का बंदरबांट धड़ल्ले से हो रहा है. एसी में बैठकर अभियंता के एमबी बुक करने व राशि भुगतान के पीछे पीसी की महिमा है. डीएम को विभागीय अभियंताओं पर नकेल कसकर सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिये ठोस पहल करना चाहिये.
कुमारी श्वेता भारती, जिला परिषद अध्यक्ष.
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