कोसी खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर

Updated at : 13 Jul 2017 5:43 AM (IST)
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कोसी खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर

खगड़िया/चौथम : लगातार बारिश व नेपाल अधिग्रहण क्षेत्र से पानी छोड़े जाने के बाद कोसी व बागमती सहित अधिकांश सहायक नदियां उफान पर है. बलतारा में कोसी नदी खतरे के निशान से 80 सेमी उपर बह रही है. कोसी का जलस्तर 34.65 मीटर पहुंच गयी है. केंद्रीय जल आयोग के बलतारा केन्द्र से से प्राप्त […]

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खगड़िया/चौथम : लगातार बारिश व नेपाल अधिग्रहण क्षेत्र से पानी छोड़े जाने के बाद कोसी व बागमती सहित अधिकांश सहायक नदियां उफान पर है. बलतारा में कोसी नदी खतरे के निशान से 80 सेमी उपर बह रही है. कोसी का जलस्तर 34.65 मीटर पहुंच गयी है. केंद्रीय जल आयोग के बलतारा केन्द्र से से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार बीते मंगलवार को 122.08 मिमी वर्षा होने का रिपोर्ट दर्ज किया गया है. वहीं बुधवार को 8 बजे सुबह तक के रिपोर्ट के अनुसार 59.4 मिमी बारिश हुआ है. इधर, नदियों में उफान से कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है. इससे नदी किनारे रहने वाले लोग सहमे हुए हैं. दियारा के कई गांव टापू बन गये हैं. कई इलाकों में आवागमन के लिये नाव का ही सहारा है.

दियारा के कई गांव टापू में तब्दील
नदियों में उफान से चौथम प्रखंड के दियारा क्षेत्र में पड़ने वाले चार पंचायतों के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गया है. दियारा क्षेत्र टापू में तब्दील हो गया है. वहीं ठुठी से धमहारा घाट स्टेशन तक जाने वाली सड़क पर आवागमन पूर्ण रूप से बाधित हो गया है. लोगों के आवागमन का साधन नबादा घाट से ठुठी तक प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना से बनी सड़क का सहारा बच गया है. यही हाल रोहियार, बुच्चा, सरसवा का है.
गरमी छुट्टी नहीं, बाढ़ में स्कूल होती है बंद
प्रखण्ड के दियारा क्षेत्र में पड़ने वाले चार पंचायत रोहियार, बुच्चा, सरसवा सहित ठुठी मोहनपुर पंचायतों में हर बरस बाढ़ आती है. बाढ़ के तीन महीने तक गांव टापू में तब्दील रहते हैं. लोगों के आवागमन का एक मात्र साधन नाव होता है. प्रशासन बाढ़ अवधि तक आवागमन के लिये रूट आधारित नाव परिचालन व्यवस्था करती आ रही है. बाढ़ की अवधि में टापू बने गांव में रह कर दिन गुजारने को मजबूर रहते है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की बजाय बाढ़ के समय छुट्टी दी जाती है. लोगों को बाढ़ की कहर से प्रभावित होने की नियति बन गई है.
अस्पताल से विद्यालय तक का बुरा हाल
बाढ़ के तीन महीने तक विद्यालय एवं विकास योजना सहित स्वास्थ्य सेवा बाधित रहता है. इस रोगियों को तत्काल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं हो पाता है. रोगी भगवान भरोसे जीवन मौत से जुझने को मजबूर होते है. हालांकि दियारा में बनाये गये नवनिर्मित सड़क से आवागमन की सुविधा सुलभ हुई है. पंचायत समिति सदस्य अनिल सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की तैयारी केवल कागजी प्रतीत होती है. उन्होंने दियारा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आवागमन, स्वास्थ्य सुविधा जैसी प्रमुख समस्या से निपटने की तैयारी की मांग की जिला प्रशासन से की है.
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