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वट सावित्री पूजा आज, महिलाएं रखेंगी व्रत

Updated at : 05 Jun 2024 11:12 PM (IST)
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देर शाम तक फल सहित पूजन सामग्री की खरीदारी करती रही

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पति की लंबी आयु को लेकर गुरुवार को सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का पूजा करेंगी. पूजा को लेकर बुधवार को बाजार में भारी भीड़ रही. चारों तरफ बाजार में पूजन सामग्री के लिए ही खरीदारी करती महिलाएं नजर आ रहे थी. जबकि समूह बनाये महिलाएं भी पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए घर से निकली थी. शहर का बड़ा बाजार, शिव मंदिर चौक और न्यू मार्केट में खरीदारी को लेकर महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा था. पति की लंबी आयु को लेकर वट सावित्री पूजा को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया. यह उत्साह इतना रहा रहा कि देर शाम तक बाजार में खरीदारी करती रही. मान्यता है कि वट सावित्री पूजा करने से पति के दीर्घायु होती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले आयी थी. तब से अपने पति की लंबी आयु को लेकर महिलाएं इसी संकल्प के साथ वट सावित्री पूजन करती आ रही है. बरगद के पेड़ के नीचे पूजा कर व्रत कथा जरूर सुनती है. मान्यता है कि बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करने से और कथा सुनने से पूजन लाभदायक होता है. इस पूजा में बाजार में पंखा और डलिया की भारी डिमांड रही. हालांकि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष बाजार में बांस के बने पंखा को लेकर ज्यादा मारामारी नहीं रहा. 30 से 40 रुपया तक बांस के पंखे बाजार में आसानी से मिल रहे थे.

फलों की कीमत में रही उछाल

त्योहार के समय में फल व पूजा सामग्री के सामानों में वृद्धि जरूर होती है. इस वट सावित्री पूजन में भी फलों के दामों में अच्छा खासा वृद्धि देखने को मिला. आम 50 रु से 70 रुपए किलो, लीची 250 से 300 रुपया सैकड़ा, अमरूद 120 रु किलो, सेब 120 रु किलो, केला 50 से 60 रु दर्जन, नारियल 40 से 50 रु पीस, अंगूर 350 से 400 रु किलो, नारंगी 170 रु किलो और सबसे अहम बांस के बने पंखे 30 से 40 रु पीस बाजार में बिके.

पूजा के दिन ही याद आता है बरगद के पेड़

पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर भले ही लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हो और और उनकी रक्षा को लेकर कसमें भी खा रहे हो. लेकिन कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर लोग इस मामले में दिखावटी ज्यादा करते हैं. शहर में 100 साल तो 100 साल से ऊपर के कई ऐसे बरगद के पेड़ हैं. जो अभी भी अपनी छांवदार से लोगों को राहत पहुंचाते हैं. शहर में भी गिने-चुने कई ऐसे बरगद के पेड़ नजर आ जाते हैं. इन सभी पेड़ों की याद वट पूजा के समय ही आती है. पूजा के समय ही इनकी बड़े ही अच्छे से पूजा की जाती है और इनकी साफ-सफाई देखभाल किया जाता है. इसके अलावा अन्य दिनों में कोई इसे झांकने तक नहीं पहुंचता.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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