सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह ठप, गर्भवती हो रहीं परेशान

सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह ठप, गर्भवती हो रहीं परेशान
अस्पताल प्रशासन ने सेवा ठप होने को लेकर कक्ष के बाहर चिपका दी है नोटिस अल्ट्रासाउंड सेवा अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों के भरोसे अबतक चल रही थी जिला रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत 3-3 महीने के लिए छात्र दे रहे थे सेवा,हाल ही में उनका यह कार्यकाल हो गया समाप्त कटिहार सदर अस्पताल में मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा पूरी तरह से ठप हो गयी है. अस्पताल प्रशासन की ओर से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर एक नोटिस चिपकाया गया है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि सदर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड जांच फिलहाल संभव नहीं है. इस सूचना के बाद से मरीज, विशेषकर गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हो रही हैं. गरीब मरीज जो मुफ्त या सस्ती जांच की उम्मीद में सदर अस्पताल आते हैं. उन्हें अब मजबूर होकर निजी क्लिनिकों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है. गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है. नियमित अल्ट्रासाउंड जांच उनकी सेहत व गर्भस्थ शिशु की स्थिति जानने के लिए आवश्यक होती है. बता दें कि पिछले एक वर्ष से अल्ट्रासाउंड की सेवा अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों के भरोसे चल रही थी. ये छात्र जिला रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत तीन-तीन महीने के लिए सदर अस्पताल में सेवा दे रहे थे. हालांकि, हाल ही में उनका यह कार्यकाल समाप्त हो गया है. नया बैच अभी नहीं है. इसी कारण फिलहाल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह बाधित हो गई है. अल्ट्रासाउंड की वैकल्पिक व्यवस्था की उठी मांग एक गर्भवती महिला के पति अशोक चौधरी, गर्भवती महिला सुधा देवी ने कहा कि सरकारी अस्पताल में जांच न होने से हम लोग बाहर निजी क्लिनिक में जाकर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं. यह खर्च गरीब परिवारों पर भारी पड़ता है. जांच का बाहर 800 से 1000 रुपये लिया जाता है. यह रकम गरीब परिवार के लिए बहुत बड़ा रकम है. लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय जैसे बड़े अस्पताल में बुनियादी सेवाओं का ठप होना गंभीर चिंता का विषय है. सदर अस्पताल जिला अस्पताल होने के नाते यहां हर सेवा गरीब मरीजों को मिलनी चाहिए. मरीजों ने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था अस्पताल प्रशासन को जरूर करना चाहिए. इधर अस्पताल प्रशासन की मानें तो रेडियोलॉजिस्ट की पोस्टिंग के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजे गए हैं. लेकिन अब तक कोई डॉक्टर जॉइनिंग के लिए आगे नहीं आये हैं.
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