कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मकर संक्रांति का पर्व पूरे श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया. यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है. इसे पुण्यकाल माना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं. देवताओं का दिन आरंभ होता है. धार्मिक विश्वास के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-तप करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. लोग प्रातःकाल स्नान कर सूर्य देव को अर्घ देते हैं. तिल, गुड़, चूड़ा, दही तथा खिचड़ी का दान करते हैं. शास्त्रों में तिल दान को विशेष फलदायी बताया गया है. जिससे पापों का नाश होता है.घर-घर में तिलकुट, लाई, गुड़ व खिचड़ी बनाई गयी. सामाजिक सौहार्द का प्रतीक यह पर्व आपसी मेल-जोल और भाईचारे का संदेश देता है. पंडितों के अनुसार मकर संक्रांति से मौसम में भी सकारात्मक परिवर्तन शुरू होता है. यह पर्व नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. बुधवार की अहले सुबह से ही शोशल मीडिया के विभिन्न साईटों पर अपने रिस्तेदारो व सूचित शुभचिंतकों के बीच मकर संक्रांति की बधाइयां देने को लेकर संदेश भेजे गये. सभी गांव में एक दूसरे के घर जाकर दही चुड़ा एवं विभिन्न प्रकार के तिलकुट का भी लुफ्त उठाया.
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