कालिदास की तपस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है बेलवा का नील सरस्वती मंदिर

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कालिदास की तपस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है बेलवा का नील सरस्वती मंदिर

बारसोई प्रखंड की बेलवा पंचायत स्थित अति प्राचीन नील सरस्वती मंदिर का पर्यटन विभाग की टीम ने गुरुवार को बारीकी से निरीक्षण किया

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नील सरस्वती मंदिर के विकास की संभावनाओं को लेकर पर्यटन विभाग की टीम ने किया निरीक्षण बारसोई. बारसोई प्रखंड की बेलवा पंचायत स्थित अति प्राचीन नील सरस्वती मंदिर का पर्यटन विभाग की टीम ने गुरुवार को बारीकी से निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान मंदिर के ऐतिहासिक महत्व, संरचनात्मक स्थिति व पर्यटन की दृष्टि से विकास की संभावनाओं का गहन आकलन किया गया. निरीक्षण में पर्यटन विभाग के कार्यपालक अभियंता विकास कुमार, सहायक अभियंता विशाल कुमार, आर्किटेक्ट इंजीनियर माधव भारद्वाज ने मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया. अधिकारियों ने मंदिर के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं के विस्तार व इसे पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की. स्थानीय स्तर पर यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि महान संस्कृत कवि कालिदास ने इसी मंदिर में माता सरस्वती के समक्ष बैठकर तपस्या की थी. जिसके कारण यह स्थल विशेष रूप से प्रसिद्ध है. इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए पर्यटन विभाग द्वारा इसके समुचित विकास की योजना पर विचार किया जा रहा है. निरीक्षण के दौरान भाजपा नेता पिंटू यादव, मंडल अध्यक्ष दीपक साह, राजीब चक्रवर्ती सहित मंदिर न्यास समिति के सदस्य प्रेम राय, भास्कर साहा, रंजन साहा, प्रणब चक्रवर्ती, पप्पू दास, गौरव राय, दयाल साहा उपस्थित रहे. स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से मंदिर के समुचित विकास व संरक्षण की मांग की. लोगों का कहना है कि यदि इस ऐतिहासिक स्थल का व्यवस्थित विकास किया जाता है तो न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकेगी.

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राजकिशोर

लेखक के बारे में

By राजकिशोर

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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