नदियों के कटाव से तीस हजार आबादी के अस्तित्व पर खतरा

Updated at : 27 Jul 2025 6:47 PM (IST)
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नदियों के कटाव से तीस हजार आबादी के अस्तित्व पर खतरा

नदियों के कटाव से तीस हजार आबादी के अस्तित्व पर खतरा

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कुरसेला गंगा, कोसी के कटाव से प्रखंड क्षेत्र के लगभग तीस हजार की आबादी पर अस्तित्व संकट का खतरा मंडरा रहा है. कटाव के खौफ ने तटीय क्षेत्र गांव के लोगों की रातों की नींद उड़ा रखी है. पत्थल टोला से लेकर खेरिया मधेली के गुमटी टोला तक लगभग आठ किमी की दायरे में नदियों के कटाव ने विनाशकारी रुख अखतियार कर रखा है. नदियों के कटाव से सैकड़ों एकड़ खेती योग्य उपजाउ जमीन नदियों के कोख में समा चुकी है. तटीय क्षेत्र के गांवों की आबादी सरकार से कटाव रोकने की मांग करते आ रही है. मांग पर कार्रवाई का नतीजा सिफर रहा है. नदियों के बदलते प्रवाह रुख से पत्थल टोला, खेरिया, बालूटोला, तीनघरिया, बसुहार, मजदिया, कमलाकान्ही, मधेली, गुमटीटोला गांवों पर कटाव से अस्तित्व संकट का खतरा बना हुआ है. गंगा, कोसी नदियों के जलस्तर में उतार चढ़ाव से कटाव का प्रकोप बढ़ता घटता रहता है. उपजाउ भूमि के नदियों के कोख में समाहित होने से तटीय क्षेत्र के किसानों के खेती के आधार खत्म हो रहा है. खेती से परिवार का भरण पोषण करने वाले किसानों के हाथों से साधन छीनता जा रहा है. खेती के नदियों के कोख मे समाहित होने से परिवार के लिए दो वक्त रोटी का जुगाड़ करना कठिन हो गया है. जानकारी अनुसार कटाव संकट का सिलसिला दशकों से चला आ रहा है. अबतक जरलाही मलेनिया आदि गांव कोसी गंगा नदियों के कोख में समाहित हो चुका है. सैकड़ों परिवार विस्थापित होकर बेघर हो चुके है. सरकार की ओर से करोड़ों खर्च के बाद कटाव निरोधक उपाय कारगर नहीं हो सका है. विगत के वर्षो से नदियों के बहाव दिशा में बदलाव होता रहा है. नदियों के बदले रुख से तटीय क्षेत्र का नया भूभाग कटाव के जद में आ जाता है. जलस्तर बढ़ने घटने के स्थितियों में कटाव प्रकोप बढ़ता घटता रहता है. विनाशकारी कटाव के बढ़ते प्रकोप से तटीय क्षेत्रों की आबादी सहमा हुआ है. नदी का कटाव खेरिया गांव के करीब आ चुका है. खेती की जमीन कटने के साथ बड़ी गांव के बड़ी आबादी पर अस्तित्व संकट का खतरा मंडरा रहा है. खेरिया गांव के करीब कटाव होने से कुरसेला रेलवे स्टेशन पर खतरा मंडराने लगा है. खेरिया गांव के ग्रामीणों ने बताया कि नदी के बदले विनाशकारी रुख से शीघ्र कटाव निरोधी कार्य की आवश्यकता है. अन्यथा गांव की आबादी का अस्तित्व बचना कठिन हो जायेगा. इसी तरह पत्थलटोला, बालूटोला, तीनघरिया, बसुहार, मजदिया, कमलाकान्ही, गुमटीटोला गांव के ग्रामीण कटाव के बढ़ते खतरे से अस्तित्व संकट को लेकर दहशत में है. करोड़ों की राशि हुआ बेकार साबित कटाव निरोधी कार्य के नाम पर खर्च किया गया करोड़ों की राशि बेकार साबित हुआ है. पिछले वर्षों में नदी के कटाव निरोधक कार्य के लिये तकरीबन 57 करोड़ की राशि का आवंटन किया गया था. गलत तरीके से बनाये गये कार्य योजना और लूट खसोट नीती की वजह से निरोधक कार्य कटाव रोकने में कारगर नहीं हो सका. योजना कार्य का करोड़ों की राशि नदी के प्रवाह में बह गया. स्थानीय लोगों की माने तो किये गये निरोध कार्य से एक वर्ष भी नदी का कटाव पर विराम नहीं लग सका. जानकारों की माने तो कटाव निरोधी कार्य योजना के नाम पर करोड़ों की राशि भ्रष्टाचार कमीशन खोरी का भेंट चढ़ गया.

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