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पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने 11,486 करोड़ रुपये किया आवंटित

Updated at : 02 Feb 2026 8:59 PM (IST)
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पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने 11,486 करोड़ रुपये किया आवंटित

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने 11,486 करोड़ रुपये किया आवंटित

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वर्ष 2014 की तुलना में 5 गुना अधिक राशि हुआ आवंटित -72,468 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं प्रगति पर कटिहार वर्ष 2026–27 के लिए रेलवे का बजट आवंटन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधीन कटिहार असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारत सरकार ने रिकॉर्ड 11,486 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं. यह आवंटन 2014 की तुलना में लगभग पांच गुना वृद्धि को दर्शाता है और इस क्षेत्र में तेज़, सुरक्षित और भविष्योन्मुख रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है. इस संबंध में कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेंद्र नरह ने सोमवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि असम और पूर्वोत्तर में कटिहार सहित बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा का विकास चल रहा है. जहां वर्तमान में 72,468 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं. रेल नेटवर्क का हो रहा विस्तार रेल नेटवर्क का और अधिक विस्तार करने के लिए नई रेल लाइनों का सर्वे किया जा रहा हैं, जबकि कोकराझार से भूटान के गेलेफू (69 कि.मी.) तक रेल कनेक्टिविटी की योजना बनाई जा रही है.मणिपुर में रेल परियोजनाएं फिर से शुरू हो गई हैं और सिक्किम एवं नागालैंड में भी कार्य तेजी से प्रगति पर हैं, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार होगा.अब 2014 की तुलना में पांच गुना अधिक निवेश के साथ, भारतीय रेलवे सर्वसमावेशी विकास को आगे बढ़ा रहा है, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है और असम, पूर्वोत्तर और पूरे देश के लिए सतत रेल विकास का नया युग ला रहा है. एनएफआर के अंतर्गत विस्तारित रेल नेटवर्क, पूर्वोत्तर में सीमापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत कर भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की हुई शुरुआत असम में बुनियादी ढांचा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक है देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवाओं का शुभारंभ, जो कामाख्या–हावड़ा मार्ग पर असम बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ती है. इसे 17 जनवरी 2026 को शुरू किया गया था. इसके अगले ही दिन असम के पहले अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं — गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक और डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर) का शुभारंभ हुआ. इन दोनों सेवाओं का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. जिससे असम, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हुई. बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव इसके अतिरिक्त, वाराणसी–सिलीगुड़ी (वाया पटना) बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है और भविष्य में इसे गुवाहाटी तक बढ़ाने की योजना है, जिससे पूर्वोत्तर भारत को देश की हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. 98% इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य हुआ पूरा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा असम और पूर्वोत्तर में कटिहार सहित रेल नेटवर्क का विस्तार और बिजलीकरण तेजी से हुआ है. 2014 से अब तक लगभग 1900 कि.मी. नई पटरिया. बिछाई जा चुकी हैं, जबकि पूर्वोत्तर के पांच राज्य पूर्ण विद्युतीकृत हो गया है और असम ने 98% विद्युतीकरण हासिल किया है. पूरे क्षेत्र में कुल 2,839 कि.मी. पटरियों का बिजलीकरण हो गया है. इसके अतिरिक्त, 502 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं और कवच संरक्षा प्रणाली के लिए 1,197 कि.मी. को स्वीकृति मिली है, जिनमें से 235 कि.मी. पर कार्य प्रगति पर है. हाथियों कोदर्घटना से बचाव को लेकर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम प्रौद्योगिकी और संरक्षा मुख्य प्राथमिकताएं बनी हुई हैं, जिसके तहत रेल पटरियों पर हाथियों की ट्रेन से टक्कर को रोकने के लिए एआई-आधारित कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं और स्मार्ट संचालन के लिए इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है. एडीआरएम मनोज कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम अनूप कुमार सिंह मौजूद थे.

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