कटिहार के 'मिनी बाबा धाम' में सावन की तैयारियां तेज: इस बार पड़ेंगे 6 सोमवारी, 1000 साल पुराने गोरखनाथ मंदिर में उमड़ेगी लाखों की भीड़

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फोटो कैप्शन- गोरखनाथ धाम मंदिर | Prabhat Khabar Network

गोरखनाथ धाम मंदिर | Prabhat Khabar Network

कटिहार का प्रसिद्ध गोरखनाथ धाम मंदिर, 'मिनी बाबा धाम', सावन मास की शुरुआत के लिए तैयार है. इस वर्ष 6 विशेष सोमवारी का संयोग बन रहा है, और 1000 साल पुराना यह ऐतिहासिक मंदिर लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की उम्मीद है.

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सावन मास की शुरुआत के साथ ही बारसोई अनुमंडल के आबादपुर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध गोरखनाथ धाम मंदिर में प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं. बांग्ला संवत के अनुसार, इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी 20 जुलाई से शुरू होने जा रही है. इस बार सावन में कुल 6 सोमवारी का विशेष संयोग बन रहा है, जबकि समापन के रूप में श्रावणी पूर्णिमा 27-28 अगस्त को पूरे श्रद्धाभाव से मनाई जाएगी.

संत गोरखनाथ ने 1053 ई. में की थी स्थापना: 1000 साल पुराना इतिहास

कटिहार जिले में "मिनी बाबा धाम" के नाम से विख्यात इस पौराणिक मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है.

"मान्यता है कि सन 1053 ईस्वी में महान संत गोरखनाथ जी महाराज असम के कामाख्या धाम से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जाने के क्रम में इस पावन भूमि पर पहुंचे थे. उन्होंने यहां तीन दिनों तक विश्राम किया और इसी प्रवास के दौरान 'गोरखचंडी' की स्थापना की. बाबा के इस पुण्य प्रताप के कारण ही इस पूरे गांव का नाम गोरखपुर पड़ा और कालांतर में ग्रामीणों ने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया." — पिंटू यादव (सचिव) एवं अक्षय सिंह (उपाध्यक्ष), मंदिर कमेटी

वास्तुकला का बेजोड़ नमूना: चूना, सुरखी और विशेष ईंटों से हुआ है निर्माण

यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्राचीन भारतीय वास्तुकला का भी एक अद्भुत उदाहरण है.

  • अद्भुत बनावट: मंदिर के ऊपरी हिस्से (शिखर) पर विशेष रूप से अशोक चक्र और नागफन अंकित हैं, जो देखने में अत्यंत आकर्षक लगते हैं.
  • प्राचीन कारीगरी: आधुनिक सीमेंट के बजाय इस मंदिर का निर्माण प्राचीन पद्धति से विशेष आकार की ईंटों, चूना और सुरखी के मिश्रण से किया गया है, जो सदियों बाद भी जस का तस मजबूत खड़ा है.
  • चारों दिशाओं में शक्तिपीठ: मंदिर परिसर की भौगोलिक बनावट भी अनूठी है, जिसके पूर्व में मां दुर्गा, पश्चिम में चैती काली, दक्षिण में महामाया और उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में स्वयं माता गोरखचंडी स्थापित हैं.

नेपाल और भूटान तक से आते हैं श्रद्धालु, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस सिद्धपीठ पर हर साल सावन, श्रावणी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के मौके पर केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा सहित पड़ोसी देश नेपाल और भूटान से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. इस वर्ष 6 सोमवारी होने के कारण भीड़ के सारे पुराने रिकॉर्ड टूटने का अनुमान है.

प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था:

भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर कमेटी के पदेन अध्यक्ष सह बारसोई एसडीओ (SDO) राजू कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से व्यापक इंतजाम किए गए हैं. पूरे मंदिर परिसर को सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की निगरानी में रखा गया है. इसके अलावा भक्तों की सुविधा के लिए 24 घंटे मेडिकल टीम, दमकल (फायर ब्रिगेड), चलंत शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है. सावन के दौरान पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों (Magistrates) की प्रतिनियुक्ति की जा रही है.


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राजकिशोर

लेखक के बारे में

By राजकिशोर

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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