राजनीतिक दल चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें शिक्षा के सर्वव्यापीकरण मुद्दा

Updated at : 10 Oct 2025 7:22 PM (IST)
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राजनीतिक दल चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें शिक्षा के सर्वव्यापीकरण मुद्दा

राजनीतिक दल चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें शिक्षा के सर्वव्यापीकरण मुद्दा

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– राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों को सौंपा जन घोषणा पत्र कटिहार आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राइट टू एजुकेशन फोरम ने शिक्षा अधिकार को सुनिश्चित करने और सर्वव्यापी गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों को अपनी ओर से तैयार किये गये जन घोषणा पत्र सौंपा है. भाजपा, कांग्रेस, राजद जदयू, सीपीआई, सीपीआई एम, भाकपा माले, वीआईपी, लोजपा आर सहित विभिन्न दलों को जन घोषणा पत्र सौंपते हुए उसे अपनी दल के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की है. यह जानकारी देते हुए फोरम के प्रांतीय संयोजक डॉ अनिल कुमार राय व सह संयोजक राजीव रंजन ने बताया कि राइट टू एजुकेशन फोरम की बिहार इकाई ने आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में शिक्षा के जन घोषणापत्र को तैयार किया है. इस घोषणापत्र में बिहार की शिक्षा के प्रमुख तथ्यों और जन मांगों को प्रस्तुत किया गया है. राजनीतिक दलों को सौंपे गये फोरम की जन घोषणा पत्र में कहा गया है कि वर्ष 1961 की जनगणना में बिहार की साक्षरता 23.4 प्रतिशत थी और राष्ट्रीय औसत 28.3 प्रतिशत था. यानी बिहार की साक्षरता राष्ट्रीय औसत से महज पांच प्रतिशत कम थी. लेकिन पिछली जनगणना (2011) में बिहार की साक्षरता 63.8 प्रतिशत थी और राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत था. अर्थात राष्ट्रीय औसत साक्षरता से बिहार 10 प्रतिशत पिछड़ गया. केवल साक्षरता ही नहीं, शिक्षा तक पहुंच के मामले में भी बिहार पिछड़ा राज्य साबित हो रहा है. वर्ष 2022-23 में संपन्न हुई बिहार जाति गणना की प्राप्तियों के अनुसार बिहार में अधिकतम पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई कर सकने वाले लोगों की संख्या महज 22.67 प्रतिशत है.10वीं कक्षा तक पढ़ने वाले महज 14.71 प्रतिशत लोग हैं और स्नातक तक पढ़ाई पूरी कर सकने वालों की संख्या महज 7.05 प्रतिशत ही है. जबकि 32.1 प्रतिशत लोग तो ऐसे है, जो कभी किसी स्कूल-कॉलेज में गए नहीं है. विद्यालय में नामांकित होने वाले बच्चों की संख्या में भी लगातार कमी आती जा रही है यू-डायस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022-23 में कक्षा एक से आठ तक नामांकित बच्चों की संख्या 1,88,50,483 थी. वह वर्ष 2023-24 में घटकर महज 1,79,22,255 रह गयी. अर्थात् महज एक साल में ही 9,28,228 बच्चों के नामांकन में कमी आयी. राजनीतिक दलों को सौंपे गये जन घोषणा पत्र में मांग की गयी है कि विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाय और कम से कम बारहवीं कक्षा तक छीजन दर शून्य किया जाय. प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपाय किए जाय. विद्यालयों के समेकन या बंद किये जाने की योजना पर अविलंब रोक लगे तथा ””एक भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्राप्ति के अवसर से वंचित न रहे की दृष्टि से आवश्यकतानुसार नये विद्यालय खोलने सहित 25 मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की गयी है.

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