जिले में धड़ल्ले से हो रहा ओवर लोडिंग, जिला परिवहन विभाग बना है मूकदर्शक

Updated at : 20 May 2025 7:55 PM (IST)
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जिले में धड़ल्ले से हो रहा ओवर लोडिंग, जिला परिवहन विभाग बना है मूकदर्शक

जिले में इन दिनों सड़क दुर्घटना की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है. एक सप्ताह की बात की जाय तो इस दौरान तकरीबन 10 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है.

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कटिहार. जिले में इन दिनों सड़क दुर्घटना की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है. एक सप्ताह पहले की बात की जाय तो इस दौरान तकरीबन 10 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है. घटना की मुख्य वजह ओवरलोडिंग, वाहनों की तेज रफ्तार, सड़क अतिक्रमण मुख्यतः शामिल है. बावजूद परिवहन विभाग इस मामले में शिथिल रवैया अपनाया है. माल वाहन पर ओवरलोडिंग को लेकर यदा कदा चेकिंग अभियान चलाकर खानापूर्ति की जाती है. लेकिन सवारी वाहन में ऑटो, चार पहिया वाहन,बस की चेकिंग देखने व सुनने को नहीं मिलती. आखिर इस मामले में परिवहन विभाग मूकदर्शक क्यों बना रहता है.

ओवर लोडिंग को लेकर नहीं होती जांच

ओवर लोडिंग को लेकर नित्य जांच नहीं होती है, जिसका परिणाम है कि वाहन चालक सीट से अधिक यात्रियों को ऑटो, चार पहिया वाहन, बस या अन्य सवारी वाहनों पर सवार करते है. हालांकि इस मामले में सिर्फ सरकारी तंत्र को गलत नहीं कहा जा सकता है. कुछ गलतियां लोगों की भी है, क्योंकि जिस बस या अन्य सवारी वाहन पर अगर सीट नही हो तथा वह सीट से अधिक यात्री को बैठा रहा है तो आप उसमें बैठने से इंकार कर दें तो निश्चित तौर पर वाहनों में सीट से अतिरिक्त लोग सवार नहीं होंगे. दूसरी यह कि अगर वाहन चालक में भी इस बात का खौफ रहे कि अगर वह सीट से अत्याधिक यात्री बैठाते हैं तो उसे निश्चित तौर पर जुर्माना लगेगा. तो बस चालक या फिर ऑटो, जीप, मिनी बस सहित अन्य वाहन चालक अपने गाड़ी में सीट से अधिक यात्री को नहीं बैठायेंगे. आवश्यक है ऐसे मामले में परिवहन विभाग रूटिंग अभियान के तहत चेकिंग अभियान जारी रखें.

बसों में बैठाये जा रहे क्षमता से अधिक यात्री

छोटी वोल्वों बस की बात की जाये तो उसमें 30- 35 एवं बड़े बस में 45-55 सीट उपलब्ध होती है, लेकिन बस चालक छोटी बस में तकरीबन 50 यात्री तथा बड़ी बसों में 60 से अधिक यात्री को लाद लेते हैं, जिस कारण सीट नहीं मिलने के कारण कुछ यात्री सीट के बगल में ही खड़े हो जाते हैं तो कुछ को बस के केबिन में ही ठूंस दिया जाता है. कभी-कभी उस बस में यात्रियों को ठूंस दिया जाता है. उक्त मामले में चालक को प्रशासनिक अधिकारियों का किसी प्रकार का भय नहीं रहता है. जिस कारण ओवरलोडिंग में वाहन चालक कोताही नहीं बरतते हैं.

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