कोढ़ा राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय दोबारा बंद

Updated at : 12 Jan 2026 7:22 PM (IST)
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कोढ़ा राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय दोबारा बंद

कोढ़ा राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय दोबारा बंद

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कोढ़ा राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय कोढ़ा एक बार फिर बदहाली का शिकार हो गया है. 6 से 7 महीनों तक लगातार बंद रहने के बाद जब यह मामला प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ. तब विभागीय दबाव में कुछ दिनों के लिए अस्पताल को खोला गया. लेकिन यह राहत स्थायी साबित नहीं हुई और अब फिर से अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटकता नजर आ रहा है. लोगों ने कहा, आयुष विभाग के अधीन संचालित यह आयुर्वेदिक औषधालय कोढ़ा के पुराने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित है, लेकिन महीनों से इसकी गतिविधियां लगभग ठप हैं. मरीज रोजाना इलाज की आस लेकर अस्पताल पहुंचते हैं. न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही किसी प्रकार की आयुर्वेदिक दवा उपलब्ध रहती है. परिणामस्वरूप मरीजों को बिना इलाज के ही घर लौटना पड़ रहा है. शंकर यादव ने बताया कि मेरे पिता को आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता थी. प्रभात खबर में खबर छपने के बाद कुछ दिनों तक अस्पताल खुला. लेकिन फिर वही स्थिति बन गई. कई बार आने के बावजूद डॉक्टर नहीं मिले. अंततः निजी क्लीनिक जाना पड़ा. रीता देवी ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाएं साइड इफेक्ट नहीं करतीं, इसलिए हम सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल पर निर्भर रहते हैं. लेकिन यहां आकर हर दिन निराशा ही हाथ लगती है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे विभागीय लापरवाही करार देते हुए नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि खबर छपने के बाद केवल दिखावे के तौर पर कुछ दिनों के लिए अस्पताल खोल देना और फिर दोबारा बंद कर देना आम जनता के साथ मजाक है. उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और अस्पताल को नियमित रूप से संचालित कराया जाय.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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