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100 साल पुरानी है रामपुर के काली मंदिर

Updated at : 20 Oct 2024 10:49 PM (IST)
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मां काली के प्रति लोगों का असीम जुड़ी हुई है आस्था

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कोढ़ा. कोढ़ा प्रखंड के रामपुर के सार्वजनिक काली मंदिर पंचायत की प्रसिद्धि का एक कारक है. यह मंदिर करीब एक सौ साल पुरानी बतायी जाती है. मंदिर के प्रति लोगों का असीम आस्था जुड़ी हुई है. प्रत्येक वर्ष काली पूजा में यहां भव्य मेला का भी आयोजन किया जाता है. सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होता है. मेले में दूर-दूर से लोग आते हैं और मां काली की पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं. श्रद्धालुओं में अथाह विश्वास है कि इस मंदिर में आकर माता काली के दरबार में जो भी भक्त सच्चे हृदय से अपने मनोवांछित कामनाएं करते हैं. माता काली उनकी मुराद अवश्य पूरी करती है. मंदिर में मनोकामना पूरी हो जाने के बाद बलि देने की भी प्रथा है.

जिस दिन मां काली की प्रतिमा स्थापित होती है उसी दिन दी जाती है बलि

पूजा कमेटी के रंजीत कुमार रजक, नरेंद्र कुमार, सरोज, हेमंत दास, वरुण यादव, सुनील सिंह, संतोष सिंह, टीटू चौधरी, प्रमोद चौधरी, अजय कुमार मेहता, मुरारी मित्रा, प्रेमलाल जायसवाल आदि सदस्यों ने बताया कि जिस दिन माता काली की प्रतिमा स्थापित होती है. उसी दिन विधिवत रूप से पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना के उपरांत बलि दी जाती है. इस मंदिर में भक्त जनों की अपार भीड़ उमड़ पड़ती है. श्रद्धालुओं के द्वारा भारी संख्या में बलि दी जाती है.

100 साल पुरानी है सार्वजनिक काली मंदिर

रामपुर पंचायत के मुखिया निर्मल कुमार हेंब्रम ने बताया कि लगभग 100 साल पुराने इस मंदिर में पूजा के अवसर पर दो दिवसीय भव्य मेला का भी आयोजन किया जाता है. मेला के अवसर पर स्वस्थ मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए पूजा कमेटी द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है. इसमें माता काली के भक्तों के आस्था को ध्यान में रखते हुए भक्ति गीतों से श्रद्धालु सराबोर होते हैं.

कहते हैं मेला कमेटी के अध्यक्ष

मेला कमेटी के अध्यक्ष बबलू यादव ने बताया कि पूर्व में यहां काली माता की मंदिर फूंस के बने हुए थे. श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जाती थी. पर दो दशक पूर्व वर्ष 2003 में स्थानीय ग्रामीणों व पूजा के कमेटी के सदस्यों के सहयोग से उक्त स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है. ज्ञात हो की पूजा व मेला कमेटी के लोग पूजा व मेला के अवसर पर पूरी तरह सक्रिय होकर इस बात का ध्यान रखा जाता है कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का कठिनाई उत्पन्न ना हो.

कहते हैं मंदिर के पुजारी

सार्वजनिक काली मंदिर के पुजारी दिलीप झा ने कहा कि मां काली काफी शक्तिशाली है. मां के दरबार में जो भी अपने व्यथा कष्ट और दुख दर्द लेकर आते हैं. माता उनके कष्ट को हर लेती है. आगे बताया कि काली पूजा के अवसर पर और समय से यहां पूजा करने रामपुर पंचायत के साथ-साथ कोढ़ा प्रखंड के विभिन्न पंचायत समेत पड़ोसी प्रखंड बरारी से श्रद्धालु भी पूजा करने आते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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