कटिहार: बुडको के ड्रेनेज लीकेज से डीएस कॉलेज परिसर में पसरा गंदा पानी, बदबू और जलजमाव से छात्र-शिक्षक बेहाल
ड्रेनेज लिक की वजह से डीएस कॉलेज परिसर में पसरा नाले का गंदा पानी | Prabhat Khabar Network
कटिहार के डीएस कॉलेज में बुडको की 220 करोड़ की ड्रेनेज परियोजना में घोर लापरवाही सामने आई है. मुख्य ड्रेनेज में लीकेज के कारण कॉलेज परिसर गंदे पानी से भर गया है, जिससे छात्र-शिक्षक बेहद परेशान हैं. इस लापरवाही ने कॉलेज को नरक बना दिया है.
कटिहार शहर में जल निकासी के लिए बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) द्वारा 220 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज निर्माण कार्य की लापरवाही ने प्रतिष्ठित दर्शन शाह (डीएस) कॉलेज को नरक बना दिया है. कॉलेज की चहारदीवारी के समीप बने मुख्य ड्रेनेज में लीकेज होने के कारण पूरे परिसर में शहर और आसपास के मोहल्लों का गंदा पानी फैल गया है. पिछले कई दिनों से बने इस भारी जलजमाव और उठ रही तीव्र दुर्गंध की वजह से छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और प्रशासनिक भवन पहुंचने वाले आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
220 करोड़ की परियोजना में घोर लापरवाही, पहला चरण भी अधूरा
कटिहार शहर को जलजमाव की समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाने और घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के उद्देश्य से बुडको द्वारा कई चरणों में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज का निर्माण कराया जा रहा है. स्थानीय लोगों और शिक्षकों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की सुस्त और लापरवाह कार्यशैली के कारण अब तक इस परियोजना के पहले चरण का कार्य भी पूरा नहीं हो सका है. इसी निर्माण के तहत डीएस कॉलेज की चहारदीवारी के ठीक बगल से गहरा गड्ढा खोदकर बड़े नाले का निर्माण किया गया. निर्माण में तकनीकी खामी के चलते चहारदीवारी के नीचे से नाला तेजी से लीक कर रहा है, जिससे आसपास के मोहल्लों का दूषित पानी लगातार कॉलेज परिसर में जमा हो रहा है.
घंटों में भर जाता है परिसर, रास्ता बदलने को मजबूर हुए विद्यार्थी
डीएस कॉलेज के शिक्षकों और कर्मियों का कहना है कि मुख्य नाला बड़ा होने के कारण रिसाव की गति बेहद तेज है और महज कुछ घंटों के भीतर ही पूरा कॉलेज परिसर गंदे नाले के पानी से लबालब भर जाता है. दिन में धूप की तपिश बढ़ने के साथ ही गंदे पानी से उठने वाली सड़ांध और बदबू पूरे माहौल को असहनीय बना देती है. इस जलजमाव के कारण कॉलेज का मुख्य रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है. स्थिति यह है कि कॉलेज पहुंचने वाले प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और विद्यार्थी अब मुख्य मार्ग छोड़कर पुस्तकालय के सामने वाले वैकल्पिक रास्ते से किसी तरह परिसर में प्रवेश करने को विवश हैं. प्रशासनिक भवन में जरूरी कागजी कामकाज के लिए आने वाले विद्यार्थियों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है.
नगर निगम के प्रयास भी साबित हुए नाकाफी
कॉलेज प्रशासन ने इस विकट स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम से गुहार लगाई थी. स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झंडोत्तोलन कार्यक्रम संपन्न कराने के उद्देश्य से निगम ने टैंकर भेजकर जलजमाव को खत्म करने का प्रयास किया, लेकिन लीकेज लगातार जारी रहने के कारण पानी खींचने की यह कोशिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई. शिक्षकों ने बताया कि 15 अगस्त को भी जलजमाव के बीच किसी तरह स्थिति को ढंककर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया. लगातार शिकायतों के बावजूद बुडको के स्तर से इस लीकेज को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा: डॉ. नारायण कुमार झा
कॉलेज के वरीय प्राध्यापक डॉ. नारायण कुमार झा ने बताया कि परिसर में जलजमाव की यह गंभीर समस्या काफी समय से बनी हुई है. उन्होंने कहा कि स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज के लीकेज की वजह से कुछ ही पलों में पूरा कैंपस दूषित पानी से भर जाता है. नगर निगम द्वारा टैंकर लगाकर पानी निकालने की कोशिश भी विफल रही है. बुडको को लगातार शिकायत देने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे कॉलेज का पठन-पाठन और प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस लीकेज को तत्काल बंद नहीं कराया गया, तो कॉलेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच गंभीर जलजनित संक्रामक बीमारियां फैलने की पूरी संभावना है.
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