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सदर अस्पताल के नये भवन में लगाये गये बेड, गद्दे, फर्नीचर समय पूर्व हो गये खराब

Updated at : 22 Feb 2026 7:04 PM (IST)
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सदर अस्पताल के नये भवन में लगाये गये बेड, गद्दे, फर्नीचर समय पूर्व हो गये खराब

सदर अस्पताल के नये भवन में लगाये गये बेड, गद्दे, फर्नीचर समय पूर्व हो गये खराब

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– कार्य एजेंसी को तीन वर्ष तक रखरखाव का दिया गया है जिम्मा, नहीं हो रहा पालन कटिहार सदर अस्पताल के नये भवन व उसमें उपलब्ध कराये गये संसाधनों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के नए भवन और उसमें लगाये गये उपकरणों को अभी तीन साल भी पूरे नहीं हुए हैं लेकिन उन सभी की हालत अभी से ही दयनीय होती जा रही है. इससे न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है बल्कि संबंधित कार्य एजेंसी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है. कटिहार सदर अस्पताल के नए भवन के निर्माण के साथ-साथ भवन में उपयोग होने वाले सभी आवश्यक सामान जैसे बेड, बेडशीट, गद्दे, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मरीजों व उनके परिजनों के लिए स्टील की कुर्सियां उसी कार्य एजेंसी द्वारा उपलब्ध करायी गयी थी. निर्माण और आपूर्ति के समय यह दावा किया गया था कि सभी सामान उच्च गुणवत्ता के हैं. लंबे समय तक उपयोग के योग्य होंगे लेकिन वर्तमान स्थिति इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. अस्पताल के 100 बेड वाले भवन में मरीजों के लिए लगाए गए कई बेड की पेंटिंग उखड़ने लगी है. कहीं-कहीं जंग के निशान भी दिखाई दे रहे हैं. गद्दे के चिथड़े उड़ गये हैं. बेडशीट जल्दी खराब हो चुके हैं. जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मरीजों के परिजनों के बैठने और विश्राम के लिए लगाई गई स्टील की कई कुर्सियां टूट-फूट गई हैं. कुछ कुर्सियों के पाये टूट गए हैं तो कुछ की सीटें मुड़ चुकी हैं. सबसे गंभीर बात यह है कि जिस एजेंसी को यह कार्य सौंपा था. उसके साथ हुए इकरारनामे के अनुसार सभी सामानों का तीन वर्षों तक रख-रखाव (मेंटेनेंस) उसी एजेंसी को करना था. बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है, न तो समय-समय पर मरम्मत की जा रही है. न ही खराब हो चुके सामानों को बदला जा रहा है. अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में पहले से ही संसाधनों की कमी रहती है. ऊपर से जो नए संसाधन उपलब्ध कराए गए थे. वे भी जल्द ही खराब हो रहे हैं. इससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. आमलोगों को असुविधा भी झेलनी पड़ रही है. अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराये. साथ ही संबंधित एजेंसी को इकरारनामे के अनुसार मेंटेनेंस कार्य पूरा करने के लिए बाध्य किया जाय. ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.

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