कटिहार के अमदाबाद में बाढ़ का पानी उतरते ही बढ़ी आफत: सड़े कचरे से उठ रही असहनीय दुर्गंध, सांस लेना हुआ मुहाल
बाढ़ के बाद कटिहार के अमदाबाद में सड़े कचरे की दुर्गंध ने जीना मुश्किल कर दिया है. गांव में हर तरफ बदबू और गंदा पानी, लोग संक्रामक बीमारियों से भयभीत.
कटिहार जिले के सीमावर्ती अमदाबाद प्रखंड में पिछले एक महीने से मची बाढ़ की विभीषिका के बीच अब एक नया और गंभीर संकट खड़ा हो गया है. नदियों का जलस्तर घटने से गांवों से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे निचले इलाकों की ओर खिसक तो रहा है, लेकिन पानी के पीछे छूट रही सड़ांध और कीचड़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं.
करीब एक पखवाड़े तक प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के दर्जनों गांवों में रिहायशी घरों से लेकर गलियों तक बाढ़ का पानी भरा रहा. अब पानी उतरने के साथ ही जलमग्न रहे खरपतवार, मृत वनस्पतियां और कचरा सड़ने लगे हैं, जिससे समूचे इलाके में बेहद तीखी और असहनीय दुर्गंध फैल गई है.

सड़कों और घरों के आसपास अटका गंदा पानी, जीना हुआ दूभर
निचले इलाकों की ओर पानी का बहाव धीमा होने के कारण प्रखंड की कई प्रमुख संपर्क सड़कों और ग्रामीण पगडंडियों पर अब भी गंदा पानी जमा है. गांवों में घरों की चौखट और आंगनों के ठीक बगल में पानी फंसा हुआ है.
दुर्गंध का आलम यह है कि लोगों को मुंह पर कपड़ा या गमछा बांधकर आवागमन करना पड़ रहा है. घरों के भीतर मौजूद परिजनों और मासूम बच्चों को लगातार सांस लेने में तकलीफ हो रही है. हवा में फैली इस बदबू के कारण भोजन करना और रात में चैन से सोना भी मुहाल हो गया है.
पीएचसी के पास प्रभात नगर में 15 दिनों से जमा पानी, बेबस हुए लोग
अमदाबाद नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के ठीक बगल में बसे छोटा रघुनाथपुर के प्रभात नगर की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
प्रभात नगर में पिछले 15 दिनों से लगातार जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. स्वास्थ्य केंद्र से चंद कदमों की दूरी पर स्थित इस रिहायशी बस्ती में जमा पानी काला पड़ चुका है और उसमें मच्छर पनप रहे हैं. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीणों को इसी बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे चर्म रोग और पैरों में संक्रमण की शिकायतें बढ़ने लगी हैं.

संक्रामक बीमारियों का मंडराया साया, ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि पानी उतरने के बाद पैदा होने वाले स्वास्थ्य संकट को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है. पानी में सड़ रहे कचरे के बावजूद अब तक प्रभावित टोलों में सैनिटाइजेशन या ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कीटनाशक दवाओं और चूना-ब्लीचिंग का बड़े पैमाने पर छिड़काव नहीं कराया गया, तो डायरिया, हैजा, डेंगू और त्वचा संबंधी संक्रामक रोग महामारी का रूप ले सकते हैं. स्थानीय लोगों ने कटिहार जिला प्रशासन और प्रखंड विकास पदाधिकारी से तत्काल संज्ञान लेते हुए सभी प्रभावित वार्डों, सड़कों और जलजमाव वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव कराने की मांग की है.
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