महानंदा के कटाव से एक दर्जन गांवों का अस्तित्व समाप्त

महानंदा के कटाव से एक दर्जन गांवों का अस्तित्व समाप्त
– हजारों विस्थापित बांध, सड़क किनारे जिल्लत भरी जिंदगी जीने को मजबूर बलिया बेलौन प्रत्येक वर्ष महानंदा नदी इस क्षेत्र के लिए काल बन कर आता है. बारिश, बाढ़ का मौसम आते ही ग्रामीणों में भय का माहौल उत्पन्न हो जाता है. इस क्षेत्र में महानंदा का जलस्तर बढ़ने घटने के साथ भीषण नदी कटाव होता है. अधिक जलस्तर बढने से बाढ़ आने पर सब कुछ बहा कर अपने साथ लेकर चला जाता है. महानंदा नदी कटाव से शिकारपुर पंचायत का माहीनगर, नाजीरपुर, तैयबपुर पंचायत का रैयांपुर, बेनीबाडी, खाडीटोला, रिजवानपुर पंचायत का रतनपुर, भौनगर पंचायत का मंझोक, धपरसीया पंचायत का मोहना, बलीहारपुर, मुकुरिया आदि गांव का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया है. उक्त गांव के अधिकांश परिवार तटबंध पर झोपड़ी बनाकर कई दशक से विस्थापित का जीवन जी रहे है. महानंदा पूर्वी तटबंध में मीनापुर से शेखपुरा, तैयबपुर, कुरूम होते हुए कस्बा टोली तक हजारों विस्थापित परिवार रह रहे है. यह सभी भूमिहिन परिवार है. सरकार के द्वारा ऐसे परिवारों को तीन डिसमिल जमीन उपलब्ध कराकर बसाने की घोषणा छलावा साबित हो रहा है. उक्त गांव का आज नाम लेने वाला तक नहीं है. नदी कटाव से विस्थापित हुए सुखी सम्पन्न लोग दूसरे पंचायतों में जा बसे है. ग्रामीण मुनतसीर अहमद ने कहा की 80 के दशक में बेनीबाडी एक आदर्श गांव था. उस समय यहां साक्षरता दर ग्रामीण क्षेत्र में सबसे अधिक था. प्राय सभी परिवार से कोई ना कोई सरकारी सेवा में कार्यरत था. आज इस गांव का नाम लेने वाला तक नहीं है. मारूफ अहसन ने बताया की यहां सभी जात धर्म के लोग आपसी भाईचारा के तहत रहते थे. लेकिन नदी कटाव के कारण सभी लोग बिखर गये. यहां मध्य विद्यालय, उच्च विद्यालय, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र एक ही जगह स्थित थी. यह सभी नदी के काल में जा मिला है. मेराज आलम ने कहा की सरकार के द्वारा कटाव रोधक कार्य में लापरवाही बरतने के कारण नदी कटाव से दर्जनों गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया है. कोई नाम लेवा नहीं है. यही हाल माहीनगर, मंझोक, जीतवारपुर, मुकुरिया, मोहना, बलीहारपुर आदि गांव की है. एकबाल हुसैन, इनायत राही, अफरोज आलम, रागिब शजर, असरार अहमद आदि ने बताया की विस्थापित सभी सूखी सम्पन्न गांव था. नदी कटाव के कारण गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया है.
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