वाहनों का जहरीला धुआं लोगों को कर रहा बीमार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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नियमों की उड़ रही धज्जियां. नहीं होती खराब वाहनों की जांच लोग स्वच्छ हवा की जगह प्रदूषित हवा सांस के द्वारा शरीर में ले रहे हैं. वायु को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सरकार द्वारा नियम बनाया गया है, लेकिन पदाधिकारियों द्वारा नियम को लागू नहीं किये जाने के कारण वाहन चालक नियमों की […]
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नियमों की उड़ रही धज्जियां. नहीं होती खराब वाहनों की जांच
लोग स्वच्छ हवा की जगह प्रदूषित हवा सांस के द्वारा शरीर में ले रहे हैं. वायु को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सरकार द्वारा नियम बनाया गया है, लेकिन पदाधिकारियों द्वारा नियम को लागू नहीं किये जाने के कारण वाहन चालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहें हैं
कटिहार : वाहनों के धुआं से पूरे शहर में वायु प्रदूषण की समस्या खड़ी हो गयी है. लोग स्वच्छ हवा की जगह प्रदूषित हवा सांस के द्वारा शरीर में ले रहे हैं. वायु को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सरकार द्वारा नियम बनाया गया है, लेकिन पदाधिकारियों द्वारा नियम लागू नहीं किये जाने के कारण वाहन चालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहें हैं और वायु प्रदूषित कर लोगों को बीमारियों की सौगात दे रहें हैं.
वाहनों की बात करें तो दो पहिया वाहन, कार, टेंपो, ट्रक, टैंकलॉरी, बस, जुगाड़ गाड़ी इत्यादि वाहन के द्वारा वायु को प्रदूषित किया जा रहा है. जिन वाहनों का सड़क पर दौड़ने की अवधि समाप्त हो चुकी है. वह वाहन भी धड़ल्ले से सड़क पर दौड़ रहे हैं. वायु प्रदूषण के कारण लोगों को विभिन्न प्रकार के रोग पकड़ रहें है. यदि सदर अस्पताल रिपोर्ट की माने तो आये दिन अधिकांश रोगी वायु प्रदूषण के कारण इलाज कराने के लिए अस्पताल आते हैं. जो बुद्धिजीवी लोग हैं वह नाक पर रूमाल या फिर सदर अस्पताल से दिये जाने वाले मास्क लगा कर ही सड़कों पर चलते हैं. वहीं अन्य लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण प्रदूषित वायु अपने शरीर में अनचाहे रूप से ले रहें है. इस संबंध में संबंधित विभाग से भी जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा है.
धुआं परीक्षण नहीं कराते हैं लोग
वाहनों से निकलने वाले धुआं से टेस्टिंग कराने के लिए जिला परिवहन विभाग ने धुआं टेस्टिंग सेंटर भी खुलवाया है. लेकिन लोग वहां नहीं जाते है और धुआं का परीक्षण नहीं कराते है नतीजतन पूरा शहर वायु प्रदूषण ग्रसित रहता है.
चेकिंग अभियान चलाने पर कई वाहन पकड़ायेंगे
जिला परिवहन विभाग की ओर से अगर अवधि समाप्त गाड़ियों और धुआं देने वाले वाहन के खिलाफ अभियान चलाने पर कई गाड़ियां जब्त होगी. साथ ही लोगों में धुआं परीक्षण कराने की जागरूकता आयेगी तभी हम अपने वायु को प्रदूषित होने से बचा पायेंगे.
वायु प्रदूषण से होती है सांस की बीमारी
सदर अस्प्ताल कटिहार के डाॅ विपिन कुमार ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी, चर्म रोग को होना लाजिमी है. वहीं वायु प्रदूषित सिर्फ हवा को ही नहीं बल्कि पानी को भी दूषित करता है. दूषित पानी पीने से तरह-तरह की बीमारी उत्पन्न हो सकती है. सिर्फ जिला प्रशासन ही नहीं बल्कि एक बुद्धिजीवी शहरी होने के नाते हमें हमारी वाहनों को जिनकी सड़क पर दौड़ने की अवधि समाप्त हो गयी है. उस वाहन को हटा देना चाहिए. हमेशा अपने वाहन का धुआं परीक्षण (मोकटेस्टिंग) कराना चाहिए, ताकि कानूनन भी हम ठीक रहें और वायु प्रदूषण से भी बच सकें.
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