बंदोबस्त जमीन का हो रहा है व्यावसायिक उपयोग
बंदोबस्त जमीन का हो रहा है व्यावसायिक उपयोगप्रतिनिधि, बारसोई, सरकार के द्वारा भूमिहीनों को बसाने के उद्देश्य से सरकारी जमीन का भूदान परवाना व बंदोबस्ती की जाती है. लेकिन, इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है. वास्तव में भूदान या बंदोबस्ती ऐसे लोगों के नाम हो गयी है, जिसको पहले से भूमि उपलब्ध है […]
बंदोबस्त जमीन का हो रहा है व्यावसायिक उपयोगप्रतिनिधि, बारसोई, सरकार के द्वारा भूमिहीनों को बसाने के उद्देश्य से सरकारी जमीन का भूदान परवाना व बंदोबस्ती की जाती है. लेकिन, इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है. वास्तव में भूदान या बंदोबस्ती ऐसे लोगों के नाम हो गयी है, जिसको पहले से भूमि उपलब्ध है और बंदोबस्ती एवं भूदान की जमीन पर दुकान बना कर दूसरे लोगों को भाड़े पर दिये हुए हैं तथा इसका लाभ कमा रहे हैं. जो नियम के विरुद्ध है. सूत्रों की माने तो अंचल पदाधिकारी एवं उनके सहयोगियों द्वारा पात्रता नहीं रखने वाले व्यक्तियों को लोभवश मोटी रकम लेकर परवाना बना दिया जाता है. वहीं जरूरतमंद मनचाहा नजराना न देने के कारण भूमिहीन रह जाते हैं और भूदान के लाभ से वंचित रह जाते हैं. इतना ही नहीं भूदान परवाना बंद कमरे में बैठ कर बना दी जाती है. जबकि जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है. ये लोग लालच वश नियम को ताक में रख कर सड़क, नाला, हाट लैंड, बिहार सरकार आम की जमीन का भी बंदोबस्ती कर देते हैं. जिससे क्षेत्र में भूमि विवाद उत्पन्न हो जाता है और आम लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है. वहीं अंचल कार्यालय में जमीन संबंधी अनेकों गोरखधंधे शुरू से चलते आ रहे हैं. जिसके चलते विकास कार्य तो प्रभावित होता ही है. आम लोग भी काफी प्रभावित होते हैं. विडंबना यह है कि अंचल कार्यालय पर उच्च पदाधिकारियों का कोई अंकुश नहीं है और अंचल कर्मी मनमानी कर रहे हैं. वहीं जनप्रतिनिधि भी इसके विरुद्ध आवाज उठाना मुनासिब नहीं समझते हैं. लोगों ने व्यावसायिक उपयोग हो रही बंदोबस्ती की भूमि को खाली करा कर जन उपयोग में लगाने की मांग की है.
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