शहर में ऑटो रोज लील रही जिंदगी

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शहर में ऑटो रोज लील रही जिंदगी शहर में ऑटो का परिचालन नियमों को ताक पर रख कर हो रहा, हमेशा दुर्घटना की बनी रहती है आशंका फोटो संख्या-5,6,7,8 कैप्सन-इसी तरह ऑटो में यात्रियों को करायी जाती है यात्रा. प्रतिनिधि, कटिहार शहर में ऑटो का परिचालन नियमों को ताक पर रखकर हो रहा है. परिवहन […]

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शहर में ऑटो रोज लील रही जिंदगी शहर में ऑटो का परिचालन नियमों को ताक पर रख कर हो रहा, हमेशा दुर्घटना की बनी रहती है आशंका फोटो संख्या-5,6,7,8 कैप्सन-इसी तरह ऑटो में यात्रियों को करायी जाती है यात्रा. प्रतिनिधि, कटिहार शहर में ऑटो का परिचालन नियमों को ताक पर रखकर हो रहा है. परिवहन विभाग एवं पुलिस सब देख कर पर भी कार्रवाई नहीं कर रही है. ऐसे में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ऐसी लापरवाही की वजह से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी है. बावजूद नियमों का पालन कराने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होने से परिवहन विभाग पर सवाल उठ रहा है. ऑटो में ड्राइवर के दाहिने तरफ यात्रियों को बैठाये जाने की वजह से शुक्रवार को नववर्ष के दिन ही एक व्यक्ति का सर धड़ से अलग हो गया था. कटिहार-पूर्णिया मार्ग पर भी वर्ष 2014 में ऑटो से दाहिने तरफ उतरने के दौरान एक बच्चे की कुचलने से मौत हो गयी थी. कई ऐसे उदाहरण है जिसमें ऑटो परिचालन में नियमों का पालन नहीं होने से दुर्घटना हुई और लोगों की मौत हुई है. मनिहारी में एक व्यक्ति की मौत के बाद प्रभात खबर ने शनिवार को शहर के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया और जानने का प्रयास किया कि ऑटो के परिचालन में किस तरह की लापरवाही बरती जा रही है. इस लापरवाही से लोगों को क्या नुकसान हो सकता है. जिसमें पाया गया गया कि अधिकांश ऑटो का परिचालन नियमों को ताक पर रखकर हो रहा है. जिसे रोकने टोकने वाला कोई नहीं है. शहीद चौक के बस स्टेंड के निकट का हाल——————————-शहीद चौक के निकट अवस्थित बस स्टेंड से खुलने वाली ऑटो में ठूंस-ठूंस कर यात्रियों को बैठाया जाता है. यहां से मनिहारी, हसनगंज, कोढ़ा, फलका सहित शहर में ऑटो का परिचालन होता है. जायजा लेने के क्रम में पाया गया कि ऑटो में ड्राइवर के दाहिने की तरफ भी यात्रियों को बैठाया गया है. जबकि यह नियमों के बिल्कुल खिलाफ है. ड्राइवर के दाहिने तरफ बैठने से यात्रियों के साथ हमेशा दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद सभी ऑटो में इसी तरह परिचालन कराया जा रहा था. जबकि जहां से ऑटो खुल रही थी वहां ट्रैफिक पुलिस के जवान भी मौजुद थे. लेकिन उनके द्वारा भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी. ऑटो को आराम जाने दिया जा रहा था. यही स्थिति बाटा चौक से डंडखोरा, सोनैली आदि स्थानों के लिए खुलने वाले ऑटो में भी देखा गया. शहर में चलने वाले सैकड़ों ऑटो में ड्राइवर के दाहिने ओर यात्रियों को बैठाकर रोज यात्रियों की ढुलायी होती है. लेकिन कोई रोकने टोकने वाला नहीं है. ऑटो की नहीं होती जांच पड़ताल ————————-शहर सहित जिले के विभिन्न मार्गों पर चलने वाले ऑटो की जांच पड़ताल न परिवहन विभाग करता है न ही स्थानीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस को मानो इन सबों से कोई मतलब ही नहीं है. ऐसे में हमेशा यात्रियों की जान सांसत में फंसी रहती है. क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है——————————-ऑटो में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर यात्रा कराना आम बात है. एक ऑटो में सात से लेकर दस लोगों को बैठाकर यात्रा होती है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है. थोड़े से पैसे की खातिर यात्रियों की जान को सांसत में डालना कहां तक जायज है.

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