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हाल जिला संयुक्त औषधालय का, चिकित्सक थे गायब, तीन कर्मी भी थे अनुपस्थित

Updated at : 09 May 2019 5:29 AM (IST)
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हाल जिला संयुक्त औषधालय का,  चिकित्सक थे गायब, तीन कर्मी भी थे अनुपस्थित

कटिहार : शहर के नया टोला स्थित जिला संयुक्त औषधालय में पदाधिकारी व कर्मियों की अपनी मनमर्जी चल रही है. आमलोगों की जानकारी से दूर चल रहे इस देसी चिकित्सालय में पदाधिकारी तो दूर यहां पर बहाल किये गये आउटसोर्सिंग से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी अपनी मर्जी से आते हैं. बेहतर स्वास्थ्य मुहैया कराने के […]

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कटिहार : शहर के नया टोला स्थित जिला संयुक्त औषधालय में पदाधिकारी व कर्मियों की अपनी मनमर्जी चल रही है. आमलोगों की जानकारी से दूर चल रहे इस देसी चिकित्सालय में पदाधिकारी तो दूर यहां पर बहाल किये गये आउटसोर्सिंग से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी अपनी मर्जी से आते हैं.

बेहतर स्वास्थ्य मुहैया कराने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपए स्वास्थ्य मद में खर्च कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी व कर्मी ऐसे हैं जो अपनी सेवा न देकर सिर्फ सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं. ऐसा ही कुछ शहर के नया टोला में चल रहे संयुक्त औषधालय का है. यहां पर चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय से नदारद रहते हैं.
आउटसोर्सिंग से बहाल किये गये चतुर्थ कर्मचारी भी अपने काम से गायब रहते हैं. बुधवार को दिन के 12:00 बजे तक न ही यहां के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन प्रसाद सिंह मौजूद थे न ही आउटसोर्सिंग से बहाल चतुर्थ कर्मचारी ही उपस्थित थे. हालांकि पदाधिकारी से फोन पर पूछे जाने पर बोले कि वह विभाग कार्य में लगे हैं.
दोपहर के 12:30 बजे के बाद चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन प्रसाद सिंह कार्यालय पहुंचे. वहीं आउटसोर्सिंग से बहाल चार कर्मी में मात्र सत्यम कुमार मौजूद था. वहीं नीतीश कुमार, सोनी कुमारी, शशि पासवान अनुपस्थित थे. दोपहर के एक बजे तक तीनों कर्मियों का कोई अता पता नहीं था.
चिकित्सक की नहीं हुई बहाली
देसी चिकित्सालय में संयुक्त रूप से आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक के जरिये मरीजों का इलाज होना है. पर, कई वर्षों से यहां यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सक का पद खाली पड़ा हुआ है.
आयुर्वेद से डॉ राजेश रंजन फिलहाल यहां पर कार्यरत हैं. आने वाले मरीजों का फिलहाल आयुर्वेदिक चिकित्सा पदाधिकारी के जरिये ही इलाज हो पा रहा है. चिकित्सकों की कमी को तो यहां पूरा नहीं किया गया, बल्कि चार चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के जरिए जरूर बहाल कर दिया गया है. फरवरी से यहां चार कर्मी योगदान दे रहे हैं,
जबकि पूरे संयुक्त औषधालय कार्यालय में स्थायी पद पर देसी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन प्रसाद सिंह, स्टेनो मनोज कुमार, लिपिक कुमार अमित, आदेशपाल रविंद्र सिंह, आयुर्वेदिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेश रंजन, डाटा ऑपरेटर रुचि कुमारी, परिचारी शशि कुमार कार्यरत हैं. सभी कर्मी कभी कार्यालय आते हैं और कभी नहीं आते हैं. इन कर्मियों का मानदेय 9500 रुपये के आसपास है. बुधवार को चार कर्मियों में तीन कर्मी अपनी ड्यूटी से नदारद थे.
चिकित्सा पदाधिकारी से कर्मी के उपस्थित न रहने पर उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इतने कम पैसे में कोई भी कर्मी काम करने के लिए तैयार नहीं है. अब सवाल यह है कि जब इतने कम पैसे में कोई कर्मी काम करने के लिए तैयार ही नहीं है तो विभाग को लिखकर उन्हें मुक्त करने की कवायद क्यों नहीं की गयी है. ऐसे कर्मियों से क्यों काम लिया जा रहा है, जो अपनी मर्जी से काम करते हों.
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