जिले दस सालों में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा है मतदान करने का आंकड़ा

KAIMUR NEWS.पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से जिले में बिहार विधानसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2015 में कैमूर जिले में 59.52 प्रतिशत मतदान हुआ था. जबकि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में कैमूर में 62.79 प्रतिशत मतदान हुआ था. वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ कर 68.24 हो गया है.
पिछले विधानसभा चुनावों की अपेक्षा लगातार बढ़ रहा मतदान का प्रतिशत चुनाव का मतदान प्रतिशत बढ़ाने में महिला और युवा मतदाताओं का बड़ा योगदान प्रतिनिधि, भभुआ पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से जिले में बिहार विधानसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2015 में कैमूर जिले में 59.52 प्रतिशत मतदान हुआ था. जबकि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में कैमूर में 62.79 प्रतिशत मतदान हुआ था. वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ कर 68.24 हो गया है. इस तरह से आंकड़ों को देखें तो जिले में पिछले तीन विधानसभा चुनावों से मतदान प्रतिशत में लगातार वृद्धि हो रही है. जहां तक मतदाताओं के संख्या की बात है तो वर्ष 2020 के चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 11 लाख 39 हजार 873 था. जबकि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में 11 लाख 73 हजार 114 हो गया. इस तरह अगर मतदाताओं के संख्या में प्रतिशत बढ़त पर गौर करें, तो वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से वर्ष 2025 के चुनाव में मतदाताओं की संख्या मात्र 2.91 प्रतिशत ही बढ़ी है, जबकि मतदान लगभग छह प्रतिशत बढ़ गया है. अगर 2015 का आंकड़ा देखें तो यह मतदान प्रतिशत पिछले 10 सालों में लगभग 10 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है. जहां तक जिले के चारों विधानसभाओं क्षेत्रों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत की बात है, तो जिले के पहाड़ और पहाड़ी सरहदों से लगे चैनपुर में मतदान का प्रतिशत अन्य तीनों विधानसभा क्षेत्रों रामगढ, मोहनियां और भभुआ से अधिक रहा है. वर्तमान चुनाव में चैनपुर विधानसभा सीट का मतदान प्रतिशत 68.49 रहा. हालांकि तीनों विधानसभा क्षेत्रों की अपेक्षा चैनपुर में मतदाताओं की संख्या भी अधिक थी. = मतदान प्रतिशत बढ़ाने में महिला और युवा मतदाताओं का बडा योगदान विधान सभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने में महिला और युवा मतदाताओं का बडा योगदान रहा है. हालांकि विधान सभा चुनावों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरूष मतदाताओं से कम रहती है. बावजूद इसके मतदान केंद्रों पर पुरूषों से महिलाओं की लाइन कहीं भी छोटी नहीं दिखाई देती है. मतदान के प्रति महिलाओं का रूझान बढ़ने का सबसे बडा कारण महिलाओं में शिक्षा का प्रसार तेजी से बढ़ना भी रहा है. साथ ही सरकार द्वारा शराब बंदी, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिये विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन , रोजगार के लिये दिये जाने वाले आर्थिक सहायता, कौशल विकास केंद्रों पर स्किल डेवलपमेंट, और महिलाओं को अलग से आरक्षित कोटा दिया जाना भी है. इसी तरह लोकतंत्र के प्रति बढ़ता युवाओं का रूझान और मतदान करने की उत्सुकता भी मतदान प्रतिशत बढ़ने का अहम कारण है. हालांकि, मतदान प्रतिशत बढ़ाने में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला स्तर से लेकर गांव स्तर तक चलाये गये मतदाता जागरूकता अभियान का असर भी मत प्रतिशत बढ़ाने में काफी हद तक कारगर हुआ है.
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