73 साल बाद भी सिसवार विद्यालय में नहीं हुआ चहारदीवारी का निर्माण

Edited by VIKASH KUMAR
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प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत कुडारी पंचायत में सिसवार गांव में सरकार द्वारा वर्ष 1952 से विद्यालय संचालित किया जा रहा है.

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रामपुर. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत कुडारी पंचायत में सिसवार गांव में सरकार द्वारा वर्ष 1952 से विद्यालय संचालित किया जा रहा है. पहले यहां प्राथमिक विद्यालय उसके बाद उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिसवार के नाम से संचालित होता था. अब यहां छात्रों के लिए वर्ष 2019 से इंटर तक पठन-पाठन की सुविधा हो गयी है और अब इसे सरकार द्वारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिसवार के नाम से संचालित किया जाता है. इस विद्यालय को सुचारू रूप से चलाने के लिए आठ कमरे व 13 शिक्षक शिक्षिकाएं कार्यरत है. यहां कक्षा एक से आठ तक 176 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं व इनको पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक हैं. वहीं, नौवीं से 12वीं तक के नामांकित बच्चों को पढ़ाने के लिए आठ शिक्षक शिक्षिकाएं नियुक्त हैं. विद्यालय के एचएम मगन शर्मा ने बताया कि इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1952 में हुई है. इस प्रकार यहां इस विद्यालय को संचालित होते 73 वर्ष हो गये हैं, लेकिन अब तक विद्यालय की अपनी चहारदीवारी विभाग द्वारा नहीं बनवायी गयी है. इस स्थिति में विद्यालय परिसर आवारा पशुओं का बसेरा बना रहता है. विद्यालय में बने भवन के बरामदे पशुओं के गोबर व मूत्र से सने रहते हैं. कभी-कभी तो विद्यालय पहुंचते ही छोटे बच्चे खेलने के दौरान गोबर में गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े भी गंदे हो जाते हैं. चहारदीवारी नहीं होने से आसानी से पशु परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, जो जहां तहां गंदगी फैलाते हैं. इसके अलावा विद्यालय की बगल से ही मुख्य सड़क गुजरती है, जिससे कभी भी बच्चों से साथ अप्रिय घटना की भी संभावना बनी रहती है. विद्यालय का मध्यांतर होते ही बच्चे एकाएक सड़क पर आ जाते हैं या खेलने के दौरान सड़क तक दौड़ लगा देते हैं, जिससे हर वक्त अनहोनी का भय बना रहता है. इसके साथ ही परिसर को हरा भरा बनाये रखने के लिए लगाये गये रंग बिरंगे फूल पत्ती के अलावा कई प्रकार के पौधाें को भी काफी नुकसान होता है, जिसे बकरियां व मवेशी कभी भी चट कर जाते हैं. एचएम ने बताया कि मौखिक व लिखित मेरे द्वारा अनेकों बार व हमारे पूर्व के एचएम द्वारा भी दर्जनों बार चहारदीवारी के लिए विभाग को सूचित करते हुए पत्र लिखा गया, लेकिन अबतक कोई पहल नहीं की गयी. इससे विद्यालय में पठन पाठन के कार्य में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. ………मुख्य सड़क से सटे विद्यालय होने से अनहोनी का बना रहता भय विद्यालय परिसर बना आवारा पशुओं का बसेरा, बच्चे परेशान

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