स्वामी विवेकानंद के जीवन व विचारों पर विस्तार से डाली गयी रोशनी भारत माता पूजन के संदेश को आगे बढ़ा रहा आरएसएस भभुआ सदर. सोमवार को युग पुरुष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिवाजी प्रभात शाखा में जयंती का आयोजन युवा दिवस के रूप में किया गया. कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर दीप ज्योति प्रज्वलित किया गया व लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की. स्वामी विवेकानंद के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला व्यवस्था प्रमुख गणेश प्रसाद ने बताया कि स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 ईस्वी में मकर संक्रांति के दिन हुआ था. उस समय मकर संक्रांति 12 जनवरी को पड़ती थी. समय क्रम के अनुसार मकर संक्रांति धीरे-धीरे 72 वर्षों में एक दिन आगे बढ़ते हुए पहले 13 जनवरी, फिर 14 जनवरी व अब 15 जनवरी को मनायी जाने लगी है. वक्ताओं ने कहा कि विवेकानंद को बाल काल से ही ईश्वर के साक्षात्कार की तीव्र इच्छा थी. इस इच्छा की पूर्ति के लिए उन्होंने कई संत महात्माओं की संगत की, लेकिन यह इच्छा तब पूरी हुई जब रामकृष्ण परमहंस के रूप में एक विद्वान ज्ञानी व सत्पुरुष से उनकी भेंट हुई. रामकृष्ण परमहंस की कृपा से उन्हें मां काली के रूप में ईश्वर का साक्षात्कार हुआ. बाद में स्वामी विवेकानंद की ख्याति विश्व स्तर पर तब और स्थापित हो गयी, जब उन्होंने 1893 ईस्वी में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में सनातन धर्म पर विस्तृत व्याख्यान दिया. खेतड़ी महाराज ने नरेंद्र नाथ से स्वामी विवेकानंद बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान निभाया. उनके सहयोग व प्रयास से ही स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका जा सके. शिकागो से लौटने के बाद उन्होंने भारत माता के पूजन का आह्वान किया व कहा कि यदि 100 वर्षों तक सभी देवी-देवताओं का पूजन छोड़कर केवल भारत माता का पूजन किया जाये, तो यह देश अपनी खोयी हुई प्रतिष्ठा व आत्म सम्मान को पुनः प्राप्त करते हुए ज्ञान के शिखर पर पहुंच सकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा उनके इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है. वक्ताओं ने बताया कि दक्षिण बिहार प्रांत में व्यापक गृह संपर्क अभियान 11 जनवरी से प्रारंभ होकर 31 जनवरी तक चलेगा. इस अभियान के तहत स्वयंसेवक अपनी-अपनी बस्तियों में घर-घर जाकर संपर्क करते हुए भारत माता के चित्र का वितरण कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. इस अवसर पर शाखा कार्यवाह पारस गुप्ता, बनारसी प्रसाद, वीरेंद्र पांडे, राजेश दास, मनोज केसरी व मुन्ना जायसवाल ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने स्वामी विवेकानंद को एक आदर्श पुरुष बताया, जिनका अनुकरण समस्त भारतीयों को करना चाहिए.
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