kaimur News. धान का बिचड़ा डालने के समय सोन नहर में पानी मिलने की उम्मीद कम

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करमा वितरणी.

kaimur News. जिले में धान का बीज डालने के लिए सर्वोत्तम नक्षत्र माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र में किसानों को सोन उच्च स्तरीय नहर केनाल से पानी मिलने की उम्मीद काफी कम दिख रही है. वर्तमान में सोन नहर केनाल में मरम्मत कार्य कराया जा रहा है.

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kaimur News. (अमित सिन्हा). जिले में धान का बीज डालने के लिए सर्वोत्तम नक्षत्र माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र में किसानों को सोन उच्च स्तरीय नहर केनाल से पानी मिलने की उम्मीद काफी कम दिख रही है. वर्तमान में सोन नहर केनाल में मरम्मत कार्य कराया जा रहा है. बता दें कि सोन उच्च स्तरीय नहर केनाल जिले के विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था की मुख्य आधार है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसानों को टेल तक पानी उपलब्ध कराने के लिए करमा, अलीपुर, सूअरा आदि समेत साढ़े तीन दर्जन से अधिक माइनरों और वितरणियों का जाल बिछा हुआ है. लेकिन, समय पर मरम्मत नहीं कराये जाने के कारण वितरणियों व माइनरों से किसानों को टेल तक पानी नहीं मिल पाता है. इससे किसान पटवन को लेकर परेशान हो जाते हैं. कई जगह नहर बांधने की नौबत आ जाती है. लाठियां तक तन जाती हैं और किसान मारपीट पर उतारू हो जाते हैं.

वर्तमान में रोहिणी नक्षत्र शुरू हो चुका है.नौतापा समाप्त होने के बाद किसान खेतों में हल उतारकर बिचड़ा डालने की तैयारी में जुट जाते हैं. साथ ही किसान आसमान में बादलों और सिंचाई साधनों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने लगते हैं. गर्मी के कारण भूजल स्तर नीचे चले जाने से मोटर पंप भी जवाब देने लगते हैं. ऐसे में मोटर पंप के भरोसे बिचड़ा डालना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है. वैसे भी मोटर पंप की सुविधा अधिकतर संपन्न किसानों तक ही सीमित है.

इस संबंध में सोन उच्च स्तरीय नहर केनाल के कार्यपालक अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि फिलहाल सोन नहर में मरम्मत कार्य कराया जा रहा है. अगर, इंद्रपुरी जलाशय से पानी छोड़ा गया, तो जिले की नहरों में छह से सात जून तक पानी आने की उम्मीद है. हालांकि, यदि मरम्मत कार्य पूरा नहीं हुआ तो पानी की आपूर्ति रोकी भी जा सकती है. ऐसी स्थिति में टेल क्षेत्र तक नहर का पानी नहीं पहुंच पायेगा.

42 माइनरों में अब भी होना है मरम्मत कार्य

खेती का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सोन उच्च स्तरीय नहर केनाल की मरम्मत अभी भी अधूरी है. गौरतलब है कि पिछले वर्ष सरकार के निर्देश पर सोन नहर के माइनरों की मरम्मत का कार्य मनरेगा के जिम्मे दिया गया था. लेकिन, तकनीकी अड़चन आने के बाद विभाग को ही यह कार्य कराने का निर्देश दिया गया. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि वर्तमान में राजपुर माइनर, मोकरी-बेतरी माइनर आदि सहित छह-सात माइनरों में काम कराया जा रहा है. लेकिन, मनरेगा से कार्य पूरी तरह नहीं होने के कारण अभी भी 42 माइनरों में मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है. इनका जियो टैग हो चुका है और दो से तीन दिनों के अंदर कार्य शुरू कर दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि 15 जून के बाद माइनरों की मरम्मत का कार्य बंद कर देना है.

क्षतिग्रस्त पुलियों व जर्जर तटबंधों से किसानों को नहीं मिल पा रहा पर्याप्त पानी

सोन उच्च स्तरीय नहर और उसकी वितरणियों की समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण कई जगह वितरणियों की पेटियां गाद से भरकर उथली हो गयी हैं. कहीं तटबंध टूटकर बिखर गये हैं, तो कहीं पुलियों में लगे ह्यूम पाइप क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. इसके कारण किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. गत सप्ताह रूपपुर और रतवार पंचायत के किसानों ने बैठक कर कसेर वितरणी स्थित क्षतिग्रस्त सेमरिया पुलिया के ह्यूम पाइप की मरम्मत कराने की मांग जिला प्रशासन से की थी. किसानों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर वे धरना-प्रदर्शन करेंगे. इसी प्रकार कई माइनरों के तटबंध जर्जर होकर ध्वस्त हो चुके हैं या जगह-जगह टूट गये हैं. ऐसे में जब इन माइनरों में पानी छोड़ा जाता है, तो पानी का बहाव इधर-उधर बिखरकर बर्बाद हो जाता है. इससे किसानों को जरूरत के अनुसार सिंचाई का पानी नहीं मिल पाता है.

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