खेलकूद की क्लास सिर्फ किताबों तक सीमित, खजुरा विद्यालय में खेल मैदान की भारी कमी

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 27 May 2026 9:39 AM

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इसी विद्यालय में खेल मैदान नहीं है.

Kaimur News : यह विद्यालय वर्ष 1969 से संचालित है, जिसे पहले प्राथमिक विद्यालय और बाद में उत्क्रमित मध्य विद्यालय के रूप में विकसित किया गया. वर्ष 2020 में इसे अपग्रेड कर प्लस-2 स्तर तक पढ़ाई शुरू की गई.

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Kaimur News : (राजू कुमार की रिपोर्ट) रामपुर प्रखंड की पसाई पंचायत स्थित खजुरा गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. यहां पढ़ाई तो नियमित रूप से चल रही है, लेकिन खेलकूद की गतिविधियां सिर्फ कागजों और किताबों तक सीमित होकर रह गई हैं.

गौरतलब है कि यह विद्यालय वर्ष 1969 से संचालित है, जिसे पहले प्राथमिक विद्यालय और बाद में उत्क्रमित मध्य विद्यालय के रूप में विकसित किया गया. वर्ष 2020 में इसे अपग्रेड कर प्लस-2 स्तर तक पढ़ाई शुरू की गई. इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय भी पास में ही संचालित है, जिसकी छात्राएं भी यहीं नामांकित हैं.

तीन-तीन विद्यालय, लेकिन एक भी खेल मैदान नहीं

ग्रामीणों और शिक्षकों के अनुसार, तीनों विद्यालयों को मिलाकर 600 से अधिक छात्र-छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके लिए खेल का एक भी मैदान उपलब्ध नहीं है. स्कूल परिसर भवनों से पूरी तरह भर चुका है, जिससे बच्चों के लिए खुली जगह नहीं बची है.

सुबह की प्रार्थना सभा भी अक्सर बरामदे या सीमित जगह में करनी पड़ती है. बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियां लगभग बंद जैसी स्थिति में हैं. बच्चे न तो दौड़ लगा पाते हैं और न ही कबड्डी या अन्य खेल खेल पाते हैं.

शिक्षा विभाग के नियमों की अनदेखी

नियमों के अनुसार किसी भी प्लस-2 विद्यालय के लिए कम से कम एक एकड़ खेल मैदान अनिवार्य है, लेकिन खजुरा में इसका पालन नहीं किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त जमीन होने के बावजूद निर्माण कार्य में खेल मैदान के लिए जगह नहीं छोड़ी गई.

सड़क पर खेलने को मजबूर बच्चे,हादसे का डर

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को खेलने के लिए जगह नहीं मिलने पर वे सड़कों या खेतों की ओर चले जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है. विद्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर मुख्य सड़क है, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही रहती है.

ग्रामीणों की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बगल की खाली जमीन को विद्यालय के लिए अधिग्रहित कर खेल मैदान विकसित किया जाए, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित न हो.

खेल मैदान की कमी सबसे बड़ी समस्या

उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुन्ना राम ने बताया कि विद्यालय में 13 कमरे हैं और कक्षा 1 से 8 तक कुल 327 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. वहीं कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं भी यहीं पढ़ती हैं.

उत्क्रमित प्लस-2 विद्यालय के प्रधानाध्यापक चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि भवन निर्माण के बाद अब 18 कमरे उपलब्ध हैं, जिससे पढ़ाई में सुविधा हुई है, लेकिन खेल मैदान की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है. उन्होंने कहा कि छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है और खेल मैदान अत्यंत आवश्यक है.

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