कलेक्ट्रेट के आलीशान चेंबर पर दो अधिकारियों में ठनी, DM के पास पहुंचा मामला
Published by : Suryakant Kumar Updated At : 05 Jun 2026 4:16 PM
कैमूर कलेक्ट्रेट
Kaimur News: कैमूर समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) में एक आलीशान चेंबर पर कब्जे को लेकर दो बड़े अधिकारियों के बीच घमासान मच गया है. पटना से स्थानांतरित होकर आए लैंड एक्विजिशन डिपार्टमेंट के नए जिला स्तरीय अधिकारी अपने पारंपरिक चेंबर में बैठना चाहते हैं, जबकि पहले से प्रभार संभाल रहे अधिकारी इसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं.
Kaimur News: (कैमूर से विकास कुमार की रिपोर्ट) :
जिला परिषद कार्यालय में पार्षदों के बीच मचा घमासान अभी शांत भी नहीं हुआ था कि समाहरणालय परिसर में दो बड़े अधिकारियों के बीच चेंबर को लेकर उपजा विवाद इस समय प्रशासनिक गलियारे में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है. कलेक्ट्रेट के एक बेहद खूबसूरत चेंबर पर अपना कब्जा जमाने के लिए दोनों अधिकारियों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है. स्थिति यह है कि हाल ही में नियुक्त अधिकारी का कहना है कि वे विभाग के जिला स्तरीय सीनियर अधिकारी के लिए निर्धारित पारंपरिक चेंबर में ही बैठेंगे, जबकि प्रभार वाले अधिकारी वहां से हटने को राजी नहीं हैं.
चेंबर की खूबसूरती और एक्सप्रेस-वे निर्माण ने बढ़ाई विभाग की अहमियत
दरअसल, यह पूरा विवाद समाहरणालय के एक विशेष आलीशान चेंबर को लेकर है. इस चेंबर को बीते दिनों पूर्व के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा काफी बेहतर और आधुनिक सुविधाओं से लैस कर खूबसूरत बनाया गया था. इस चेंबर की भव्यता को देखकर अन्य अधिकारी भी इस विभाग का प्रभार लेने के लिए हमेशा लालायित रहते थे. लंबे समय से भू-अर्जन विभाग में जिला स्तरीय पूर्णकालिक पदाधिकारी का पद खाली होने के कारण यह कामकाज प्रभार में चल रहा था. एक्सप्रेस-वे निर्माण के चलते इस समय जिले में इस विभाग की उपयोगिता और महत्व काफी बढ़ गया है.
प्रभार तो मिला पर चेंबर नहीं, दोनों तरफ से शह-मात का खेल शुरू
हाल ही में पटना मुख्यालय से इस महत्वपूर्ण विभाग के लिए नए जिला स्तरीय पदाधिकारी की पोस्टिंग कैमूर में की गई है. जब नए साहब कार्यभार संभालने के लिए समाहरणालय पहुंचे, तो उन्हें कागजी तौर पर प्रभार तो मिल गया, लेकिन बैठने के लिए उनका पारंपरिक चेंबर नहीं मिला. पहले से प्रभार में तैनात अधिकारी उस आलीशान केबिन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं. चेंबर पर वर्चस्व को लेकर दोनों अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष रूप से शह-मात का खेल जारी है, जिससे कलेक्ट्रेट के अन्य कर्मियों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
विवाद सुलझाने के लिए डीएम के पाले में पहुंची गेंद
चेंबर को लेकर दोनों पक्षों में ठनने और विवाद को लगातार बढ़ता देख आखिरकार यह संवेदनशील मामला डीएम के पास पहुंच गया है. अब कलेक्ट्रेट के इस अंदरूनी घमासान को शांत करने और यह तय करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी पर है कि कौन सा अधिकारी किस चेंबर में बैठकर अपना शासकीय कार्य संचालित करेगा. जिलाधिकारी के अंतिम निर्णय के बाद ही समाहरणालय का यह हाई-प्रोफाइल चेंबर विवाद शांत होने की उम्मीद है. दोनों अधिकारियों के लिए नाक की लड़ाई बन चुके इस आलीशान चेंबर में कौन बैठता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
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