कैमूर : मोहनिया चेकपोस्ट पर अवैध वसूली का खुलेगा राज, दो साल में ₹5.87 करोड़ घट गया सरकारी राजस्व

मोहनिया समेकित चेकपोस्ट
कैमूर चेकपोस्ट पर लंबे समय से चल रहे अवैध वसूली और राजस्व चोरी के खेल का बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई ने कई परतों को खोला है, जिसमें विभागीय उदासीनता भी सामने आई है.
Kaimur Checkpost Scam : कैमूर जिले में जीटी रोड स्थित चेकपोस्ट पर लंबे समय से चल रहे अवैध वसूली के खेल का बड़ा खुलासा हुआ है. सोमवार की रात पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के निर्देश पर हुई छापेमारी में चार सैप जवानों और पांच एंट्री माफियाओं की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी. इस कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया कि चेकपोस्ट पर लंबे समय से संगठित तरीके से अवैध वसूली का खेल चल रहा था.
इस मामले की गहराई से जांच करने पर जो तथ्य सामने आए, वे और भी चौंकाने वाले हैं. आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर मालवाहक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर चेकपोस्ट से मिलने वाला सरकारी राजस्व लगातार घटता जा रहा है. यह स्थिति खुद ही बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है.
Kaimur News : हर साल घटता राजस्व बना बड़ा सवाल
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में इसी चेकपोस्ट से करीब 57 करोड़ 35 लाख रुपये का राजस्व वसूला गया था. इसके बाद वर्ष 2024-25 में यह घटकर 55 करोड़ 80 लाख रुपये रह गया. वहीं वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा और गिरकर 51 करोड़ 48 लाख रुपये पर पहुंच गया.
यह गिरावट तब हो रही है जब जीटी रोड पर मालवाहक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सामान्य स्थिति में राजस्व बढ़ना चाहिए था, लेकिन इसके उलट लगातार कमी आना कहीं न कहीं बड़े स्तर पर गड़बड़ी की ओर संकेत करता है.
Transport Department : परिवहन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे गंभीर पहलू यह है कि पिछले तीन वर्षों से राजस्व में लगातार गिरावट के बावजूद परिवहन विभाग ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की. न तो इसकी गहन समीक्षा की गई और न ही यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर वसूली में कमी क्यों आ रही है.
यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया जाता, तो शायद सरकारी राजस्व को हो रहे नुकसान को रोका जा सकता था.
शिफ्ट इंचार्ज की भूमिका भी संदेह के घेरे में
चेकपोस्ट पर तैनात शिफ्ट इंचार्ज की भूमिका को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं. जब खुलेआम सैप जवान और एंट्री माफिया मिलकर अवैध वसूली कर रहे थे, तो उस समय शिफ्ट इंचार्ज कहां थे.
जानकारों का मानना है कि इस तरह का काम बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं है. जिस तरह से मालवाहक वाहनों से वसूली कर उन्हें पास कराया जा रहा था, उससे साफ संकेत मिलता है कि पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था.
पुलिस कार्रवाई से खुली परतें
एसपी के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने पूरे मामले को उजागर कर दिया है. रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद अब यह साफ हो गया है कि चेकपोस्ट पर राजस्व चोरी और अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा था.
इस कार्रवाई के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच होगी और इसमें शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी.
जीटी रोड चेकपोस्ट पर सामने आया यह मामला सिर्फ अवैध वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम में व्याप्त खामियों को उजागर करता है. लगातार घटता राजस्व और विभागीय उदासीनता अब जांच का विषय बन चुका है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गहराई से कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है.
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