कैमूर में गोरिया नदी में उफान से चंदेश छलका पर एक फीट पानी, चार पंचायतों का संपर्क प्रभावित
चंदेश छलके पर चल रहा गोरिया नदी का पानी | Prabhat Khabar Network
गोरिया नदी में उफान के कारण चन्देश छलके पर एक फीट पानी बह रहा है, जिससे कई पंचायतों का संपर्क टूटा और किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।
Kaimur News : कैमूर के रामगढ़ प्रखंड क्षेत्र में गोरिया नदी के उफान ने एक बार फिर ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है. नदी का पानी चंदेश छलका के ऊपर करीब एक फीट की ऊंचाई तक बह रहा है. इससे इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी हो रही है, वहीं चार पंचायतों के ग्रामीणों का मुख्य सड़क से संपर्क भी प्रभावित हो गया है. पानी बढ़ने पर लोगों को रामगढ़ बाजार पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है.
चार पंचायतों के ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय करने की मजबूरी
गोरिया नदी में उफान आने के बाद चंदेश, कोटा, दुमदुमा और मुखरांव पंचायत के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है. चंदेश छलका पर पानी बढ़ने के कारण रामगढ़ बाजार जाने वाले लोगों को एवती गांव होते हुए नुआंव बाजार के रास्ते रामगढ़ पहुंचना पड़ता है. इससे उन्हें करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है.
हर साल जलमग्न हो जाती है सैकड़ों एकड़ धान की फसल
नदी के उफान का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है. हर साल बरसात के दौरान नदी का पानी आसपास के खेतों में फैल जाता है, जिससे किसानों की मेहनत से लगायी गयी धान की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है. चंदेश के किसान रवि शंकर राय उर्फ टिंकू ने बताया कि नदी के तटीय क्षेत्र में करीब चार किलोमीटर की परिधि में सैकड़ों एकड़ खेत हैं. धान की रोपनी के बाद नदी में उफान आने पर कई किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है.
कोचस जाने के लिए भी 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर
चंदेश छलका पर पानी आने से रामगढ़ प्रखंड की तीन पंचायतों के लोगों की परेशानी भी बढ़ जाती है. कोचस बाजार जाने वाले ग्रामीणों को छलका पर पानी के कारण करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे लोगों को मोहनिया के रास्ते कोचस बाजार जाना पड़ता है.
छोटा पुल या नदी की खुदाई से हो सकता है समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि यदि चंदेश छलका पर छोटा और ऊंचा पुल बनाया जाए या नदी की पर्याप्त खुदाई करा दी जाए, तो पानी आसानी से पुल के नीचे से निकल सकता है. इससे बरसात में सड़क पर पानी का दबाव कम होगा और दोनों प्रखंडों के बीच आवागमन भी सुचारु रह सकेगा.
बड़े पुल के निर्माण का प्रस्ताव पहले भी भेजा गया
ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्ष पहले स्थानीय विधायक ने चंदेश नदी पर बड़े पुल के निर्माण को लेकर संबंधित विभाग को जानकारी दी थी. इसके बाद पदाधिकारियों ने स्थल का जायजा लेकर मापी भी की थी और वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गयी थी. हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है.
कलानी बाजार के कारोबार पर भी पड़ता है असर
कलानी बाजार के समाजसेवी गोलू जायसवाल ने कहा कि गोरिया नदी में उफान के कारण बरसात के दिनों में अक्सर दोनों प्रखंडों का संपर्क मार्ग टूट जाता है. इसका सीधा असर कलानी बाजार के कारोबार पर भी पड़ता है. आवागमन बाधित होने से ग्रामीण बाजार तक नहीं पहुंच पाते और दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित होता है.
ग्रामीणों ने बड़े पुल के निर्माण की उठायी मांग
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से चंदेश छलका पर स्थायी समाधान के लिए बड़े पुल का निर्माण कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि पुल बनने से न सिर्फ बरसात में आवागमन की समस्या दूर होगी, बल्कि किसानों को हर साल होने वाले फसल नुकसान और बाजार से कटने की समस्या से भी राहत मिल सकेगी.
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