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भिखारी ठाकुर का नाम लेकर बस लोकप्रियता बटोरते हैं कलाकार : इंदू सोनाली

Updated at : 28 Sep 2025 6:14 PM (IST)
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भिखारी ठाकुर का नाम लेकर बस लोकप्रियता बटोरते हैं कलाकार : इंदू सोनाली

भोजपुरी तथा हिंदी फिल्मों में पार्श्व गायन कर चुकी गायक कलाकार इंदु सोनाली ने कहा कि भिखारी ठाकुर का नाम लेकर कुछ कलाकार बस अपनी लोकप्रियता बटोरने में लगे हैं.

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– जमुई में भोजपुरी गायिका इंदु सोनाली ने कहा-शारदा सिन्हा की कमी कोई नहीं कर सकता पूरी जमुई. भोजपुरी तथा हिंदी फिल्मों में पार्श्व गायन कर चुकी गायक कलाकार इंदु सोनाली ने कहा कि भिखारी ठाकुर का नाम लेकर कुछ कलाकार बस अपनी लोकप्रियता बटोरने में लगे हैं. इन लोगों को भोजपुरी इंडस्ट्री की कोई परवाह नहीं है. दरअसल, इंदु सोनाली रविवार को एक समारोह में हिस्सा लेने जमुई जिले के खैरा पहुंची थी. जहां उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी के लिए जो किया है, उसे कोई नहीं अपनाना चाहता. लोग केवल उनका नाम और उनके परिवार का नाम लेकर अपनी लोकप्रियता चमकाने में लगे हैं. लोग उनके घर जाते हैं उनके परिवार के लोगों के साथ फोटो खिंचवाते हैं, ताकि उनका करियर बन सके. गायिका ने कहा कि वर्तमान दौर में भोजपुरी इंडस्ट्री में दिवंगत लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा से बड़ा कलाकार कोई नहीं हो सकता. उनके चले जाने के बाद उनकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता. इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग कुछ भी गा लेते हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं. फिर यही लोग खुद को सुपरस्टार बुलाने लगते हैं, लेकिन असल में भोजपुरी और मैथिली संस्कृति की जनक शारदा सिन्हा रही है. उन्होंने इस इंडस्ट्री को जो कुछ भी दिया है कोई भी वहां तक नहीं पहुंच सकता है. गायिका ने कहा कि अगर किसी को वाकई में भोजपुरी इंडस्ट्री को आगे बढ़ाना है, तो उन्हें चाहिए कि वह शारदा सिन्हा जी के रास्तों पर चले तभी भोजपुरी का विकास सही मायनों में हो सकता है. शारदा सिन्हा के बगैर भोजपुरी जगत की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है. मैं अपना पहला गाना उदित नारायण के साथ गाया था. अभी जो लोग सुपरस्टार बने बैठे हैं, उस समय दूर-दूर तक उनके नाम की चर्चा भी नहीं थी. शारदा सिन्हा इस दुनिया से चली गयी, लेकिन वह आज भी हम सबों के बीच हैं. इस दौरान उन्होंने अपना संगीत का सफर भी बताया. उन्होंने कहा कि मुझे संगीत विरासत में मिली थी. मेरे पिता और दादाजी मुझे घर पर ही सिखाया करते थे. मैं अक्सर भक्ति जागरण में गाया करती थी. मेरी शुरुआत एक मेले से हुई जहां मैं मंच पर जाकर एक गाना गायी थी, इसके बाद धीरे-धीरे मुझे कई जगह से गाने का ऑफर मिलने लगा और फिर मैं इसी क्षेत्र में चली आयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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