सीएम को चंपारण सत्याग्रह मनाने का हक नहीं : मांझी

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पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आदिवासी मुसहर युवा संवाद कार्यक्रम को किया संबोधित 25 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी प्रदेश में दलित व आदिवासी भीख मांगने पर मजबूर हैं सिकंदरा (जमुई) : मुसहर और आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं. लेकिन शिक्षा, रोजगार, नौकरी से लेकर अन्य क्षेत्रों में हमें लगातार दरकिनार […]

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पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आदिवासी मुसहर युवा संवाद कार्यक्रम को किया संबोधित

25 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी प्रदेश में दलित व आदिवासी भीख मांगने पर मजबूर हैं
सिकंदरा (जमुई) : मुसहर और आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं. लेकिन शिक्षा, रोजगार, नौकरी से लेकर अन्य क्षेत्रों में हमें लगातार दरकिनार किया जा रहा है. वर्तमान समय में हम लोगों को अपने हक के लिए एक होने की आवश्यकता है. तभी हमारा समाज आगे बढ़ पायेगा.
उक्त बातें पूर्व मुख्यमंत्री सह हिंदुस्तानी आवाम मोरचा सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने गुरुवार को प्रखंड क्षेत्र के लछुआड़ स्थित काली मंदिर मैदान में आयोजित आदिवासी मुसहर युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपना पूरा भाषण मगही में दिया. उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर में आनेवाले लोगों को आरक्षण का
सीएम को चंपारण…
लाभ नहीं दिया जाना चाहिये. जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ गये, उन्हें स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ देना चाहिये. ताकि देश के जरूरतमंद दलित व वंचित तबका को आरक्षण का सही फायदा मिल सके. उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने जाति विहीन समाज की बात की थी. लेकिन ब्राह्मणवादी व्यवस्था से परेशान होकर उन्हें हिंदू धर्म छोड़ कर बौद्ध धर्म अपनाना पड़ा था. पूर्व मुख्यमंत्री श्री मांझी ने दलित और आदिवासियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि बिहार में दलित और आदिवासियों की जनसंख्या 25 प्रतिशत है.
लोहिया जी ने कहा था कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी. लेकिन 25 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी बिहार में दलित और आदिवासी भीख मांगने पर मजबूर हैं. मुसहर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर 15 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में विशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए 5 एकड़ से कम जोतवाले किसानों के पटवन के लिए मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी. लेकिन नीतीश कुमार ने इस निर्णय को रद्द करते हुए किसानों का बिजली बिल तिगुणा कर दिया. ऐसे व्यक्ति को चंपारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष मनाने का कोई हक नहीं है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर किसानों की स्थिति सुधारने के लिये मैंने किसानों को धान पर 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया था. लेकिन नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बोनस को समाप्त कर दिया. मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने लड़कियों के लिये कॉलेज की पढ़ाई फ्री कर दी थी. बेरोजगारों के लिये प्रतिमाह एक हजार रुपये भत्ता देने का निर्णय लिया था. मेरा यही सब निर्णय नीतीश कुमार को खटकने लगा और उन्होंने मुझे बेइज्जत करके मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया. इस दौरान उन्होंने एक दलित को देश के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सिकंदरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी महादेव मांझी ने किया. मौके पर हम के जिलाध्यक्ष शिवटहल मांझी, राजेश्वर मांझी, रामचंद्र राउत, पूर्व जिप सदस्या पूनम देवी, प्रफुल्ल मांझी, प्यारे मांझी, मुकेश मांझी, अशोक मांझी, चंद्रदेव मांझी, शेखर कोड़ा, मोरम कोड़ा, चंद्रशेखर मांझी, सौदागर मांझी समेत कई नेताओं ने कार्यक्रम को संबोधित किया. मौके पर काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.
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