कार्यालय व कर्मी का अभाव

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परेशानी. जिले में दयनीय है आपदा विभाग की स्थिति जिले में आपातकालीन अभियान केंद्र नहीं है. वर्तमान में किसी भी प्रकार की आपदा आने पर जिला नियंत्रण कक्ष के सहयोग से ही लोगों को सहायता प्रदान की जाती है. जमुई : राज्य सरकार द्वारा जिले में आपदा प्रबंधन विभाग की स्थापना कर दी गयी है […]

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परेशानी. जिले में दयनीय है आपदा विभाग की स्थिति

जिले में आपातकालीन अभियान केंद्र नहीं है. वर्तमान में किसी भी प्रकार की आपदा आने पर जिला नियंत्रण कक्ष के सहयोग से ही लोगों को सहायता प्रदान की जाती है.
जमुई : राज्य सरकार द्वारा जिले में आपदा प्रबंधन विभाग की स्थापना कर दी गयी है लेकिन न तो विभाग के पास अपना कोई स्थायी कार्यालय है और न ही पर्याप्त संख्या में कर्मी हैं. इस कारण लाभार्थियों को ससमय अनुदान देने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. फिलहाल सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जगह जगह पर फ्लैक्स या बैनर लगाकर विभाग के द्वारा प्रदान किये जाने वाले अनुदान का प्रचार प्रसार किया जाता है. लोगों को सही तरीके से आपदा के समय लाभ पहुंचाने के लिए सभी विभाग के पदाधिकारियों को जिला टास्क फोर्स के तहत रखा गया है.
एक से 15 जुलाई तक भूकंप सुरक्षा सप्ताह को लेकर विद्यालय के सभी शिक्षकों और छात्र छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसके पूर्व भी बाढ़ सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षण दिया जा चुका है. विभिन्न प्रकार के आपदा से बचाव के लिए मॉक ड्रील के माध्यम से भी छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुके है. शीघ्र ही जन प्रतिनिधि की कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा.
बाढ़, भूकंप, सुखाड़, शीतलहर, लू, वज्रपात, आगजनी, भू-स्खलन, बेमौसम बारिश व ओला वृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा में मौत होने पर अनुदान दिया जाता है और सड़क दुर्घटना या डूबने से मौत होने पर सरकार के निर्देशानुसार चार लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है. वहीं फसल क्षति या पशु क्षति होने पर भी विभाग द्वारा अनुदान दिया जाता है. जबकि आगजनी से नुकसान होने पर 9800 रुपये सहायता के तौर पर प्रदान किया जाता है. जिसमें छह हजार रुपये नगद और 1800 रुपये बरतन खरीदने और दो हजार रुपये कपड़ा खरीदने के नाम पर अनुदान दिया जाता है. विभागीय कर्मियों की मानें तो पीड़ित व्यक्ति को अंचलाधिकारी के माध्यम से स्थल जांच करा कर 24 घंटे के अंदर भुगतान करने की व्यवस्था है. संदेह होने पर बारीकी से जांच कर भुगतान किया जाता है. पशुधन के तहत कुक्कुट से लेकर सभी प्रकार के दुधारु और गैर दुधारु पशु आते हैं. अगलगी में पशु शेड के जलने पर भी 2100 रुपये का अनुदान दिया जाता है. इसके अलावे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आगजनी से प्रभावित लोगों को प्राथमिकता देकर गृह का आवंटन किया जाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
फिलहाल विभाग द्वारा बाढ़ से बचाव के लिए तैयारी की जा रही है और सभी अंचलाधिकारी को संकटग्रस्त समूह के आसपास बचाव राहत दल का गठन करने का निर्देश दिया गया है. आपदा आने पर अंचल स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है. जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी, थानाध्यक्ष और फायर बिग्रेड के पदाधिकारियों को रखा गया है. साथ ही सरकार से समुचित सुविधा की भी मांग की गयी है.
सुबोध कुमार, जिला आपदा प्रबंधन प्रभारी, जमुई
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