सितंबर के अंत तक बंद होगा जमालपुर रेल कारखाने का डीजल पीओएच शॉप, दूसरी जगहों पर भेजे जा रहे कर्मचारी

Updated at : 31 Aug 2020 8:10 AM (IST)
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सितंबर के अंत तक बंद होगा जमालपुर रेल कारखाने का डीजल पीओएच शॉप, दूसरी जगहों पर भेजे जा रहे कर्मचारी

स्टीम इंजन की तरह ही अब भारतीय रेल से सितंबर महीने में डीजल इंजन का परिचालन भी बंद कर दिया जाएगा. इसके कारण जमालपुर कारखाना अंतर्गत डीजल पीओएच शॉप भी बंद कर दिये जाएंगे.

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जमालपुर : स्टीम इंजन की तरह ही अब भारतीय रेल से सितंबर महीने में डीजल इंजन का परिचालन भी बंद कर दिया जाएगा. इसके कारण जमालपुर कारखाना अंतर्गत डीजल पीओएच शॉप भी बंद कर दिये जाएंगे. इसको लेकर यहां कार्यरत सैकड़ों रेल कर्मियों को किसी अन्य शॉप में भेजे जाने की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गयी है, परंतु चर्चा यह बनी हुई है कि आखिर डीजल पीओएच शॉप के इंफ्रास्ट्रक्चर का क्या होगा. वैसे यदि पूर्व रेलवे मुख्यालय के अधिकारी और जमालपुर रेल कारखाना प्रबंधन आरंभ से सजग रहता तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलता. क्योंकि रेलवे बोर्ड ने मार्च महीने में ही जमालपुर रेल कारखाना को 10 एमू/मेमू के पीओएच के ट्रायल का आदेश जारी कर दिया था.

डीजल पीओएच शॉप के कर्मचारियों का अन्य शॉप में होगा ट्रांसफर: बताया गया कि डीजल लोको के परिचालन को समाप्त करने की घोषणा के साथ ही जमालपुर कारखाना के डीजल पीओएच शॉप के रेल कर्मियों को अन्य शॉप में ट्रांसफर किया जा रहा है. इसके लिए लगभग ढाई सौ रेल कर्मियों का डाटा उप मुख्य यांत्रिक अभियंता तक पहुंचाया जा चुका है. इसके बारे में एक से दो दिनों के अंदर निर्णय लिया जायेगा.

अरबों का इंफ्रास्ट्रक्चर है डीजल पीओएच शॉप में: डीजल पीओएच शॉप में डीजल लोको के विशेषज्ञ रेलकर्मी काम करते हैं, जो डीजल लोको के पीओएच के कार्य को निपुणता के साथ पूरा करते हैं. ऐसे में इस शॉप के बंद होने की स्थिति में यहां कार्यरत रेलकर्मी अन्य शॉप में स्किलफुल परफॉर्मेंस नहीं दे सकते. तो दूसरी ओर डीजल पीओएच शॉप में अरबों रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़ा किया जा रहा है. ऐसे में इस शॉप के इंफ्रास्ट्रक्चर के सदुपयोग के लिए वहां उस शॉप को बगैर बंद किये ही उसी नेचर के जॉब की भी वकालत की जा रही है.

इतना ही नहीं यह भी मांग की जा रही है कि डीजल पीओएच शॉप में ही वहां कार्य करने वाले रेल कर्मियों को अलग से कोई वर्क लोड दिया जाये. वैसे बताया गया कि डीजल पीओएच शॉप के बंद हो जाने की स्थिति में रेल कारखाना के दो से तीन अन्य शॉप के भी बंद होने की संभावना बन गयी है. इसमें ट्रेक्शन मशीन शॉप, डीजल कंपोनेंट्स शॉप और शीट मेटल शॉप शामिल है. क्योंकि डीजल पीओएच के कार्य में ही इन तीनों शॉप की उपयोगिता बनी हुई थी.

कहते हैं यूनियन नेता: इस संबंध में इस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कारखाना शाखा जमालपुर के शाखा मंत्री मनोज कुमार ने बताया कि डीजल लोको परिचालन बंद होने के कारण डीजल पीओएच का कार्य भी बंद किया जा रहा है. ऐसे में जमालपुर कारखाना को इलेक्ट्रिक लोको के पीओएच तथा टावर कार के निर्माण का कार्यभार मिलना चाहिए.

रेलवे बोर्ड के आदेश को यदि पूर्व रेलवे मुख्यालय व जमालपुर का रेल कारखाना प्रबंधन ने गंभीरता से लिया होता तो संभवत: आज इस प्रकार की स्थिति नहीं होती और जमालपुर कारखाना के डीजल पीओएचएस शॉप में कार्य करने वाले रेल कर्मियों के भविष्य को लेकर भी उहापोह की स्थिति नहीं बनती. और तो और जमालपुर रेल कारखाना को इलेक्ट्रिक वर्क लोड मिलने की संभावना भी बलवती बनी रहती.

बताया गया कि रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर मैकेनिकल इंजीनियरिंग (पी)-I एडब्ल्यू खान ने भारतीय रेल के सभी प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर को पिछले पांच मार्च 2020 को पत्र संख्या 2020/एम (डब्ल्यू) 814/1 द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए पूरे भारतीय रेल के विभिन्न जोन के लिए रोलिंग स्टॉक के पीओएच प्रोग्राम के अनुमोदन की जानकारी दी गयी थी. इसमें उन्होंने अपने 18 पेज के पत्र के पेज संख्या 14 पर यह स्पष्ट किया था कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए पूर्व रेलवे अंतर्गत विभिन्न रेल कारखानों को 1283 एमू/मेमू के पीओएच का कार्यभार दिया जाता है. इसमें कचरा पाड़ा रेल कारखाना को 1273 एमू/मेमू के पीओएच का कार्यभार दिया गया था और रेल कारखाना जमालपुर को भी 10 एमू/मेमू के पीओएच का कार्यभार सौंपा गया था.

सूत्र बताते हैं कि स्थापना काल से ही रेल कारखाना जमालपुर के कारीगरों ने अपनी उम्दा कारीगरी के दम पर पूरे भारतीय रेल में अपना परचम लहराया है. ऐसे में उन्हें जब 10 एमू/मेमू के पीओएच का कार्यभार मिलता उसे निश्चित रूप से यहां के कारीगर पूरा कर लेते और तब यहां स्थाई रूप से एमू/मेमू के पीओएच का कार्यभार मिलने की संभावना प्रबल हो जाती. परंतु रेलवे बोर्ड के इस आदेश को किस परिपेक्ष्य में अनदेखा किया, यह तो रेल के कोई वरीय अधिकारी ही बता सकते हैं. परंतु इतना तय है कि जमालपुर कारखाना ने एक स्वर्णिम मौका खो दिया है.

posted by ashish jha

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