मजदूर दिवस: बिहार से हर साल पलायन करते 40 लाख से अधिक लोग! जानिए किस समुदाय के श्रमिक अधिक जा रहे बाहर..
मजदूर दिवस 2023: एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल बिहार से करीब 40 लाख से अधिक लोग पलायन करते हैं. दूसरे राज्यों में जाकर वो वहां की आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. जानिए किन राज्यों में बिहार के मजदूरों की दिलचस्पी बढ़ी है.
Majdur divas 2023: देश के विकास में बिहारी श्रमिकों का बड़ा योगदान है. कई विकसित राज्यों के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट से लेकर बढ़ते आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के दखल में बिहारियों की बड़ी भूमिका है. रोजगार की तलाश में बिहार से हर साल बड़ी संख्या में लोग देश-विदेश में जाते हैं. वहां चल रही आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
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रिपोर्ट बताती है कि पंजाब, तमिलनाडु, दिल्ली, मुंबई, हरियाणा जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर, इंडस्ट्री और कृषि में बिहारी श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उदाहरण के तौर पर पंजाब के कपड़ा, साइकिल, चमड़ा और कृषि उद्योग बिहारी श्रमिकों के भरोसे ही चलते हैं. कोरोना काल में पंजाब में जब 2 लाख से अधिक मजदूर पलायन कर गये थे, तो उस दौरान कई कंपनियों ने ऑर्डर लेना बंद कर दिया था और कुछ कंपनियां बंद होने के कगार पर आ गयी थीं.
दिल्ली की एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट की मानें तो बिहार से हर साल 40 लाख से अधिक लोग पलायन करते हैं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पंजाब में पहले जहां लोग कृषि क्षेत्र में काम करने के लिए पंजाब जाया करते थे, अब वे औद्योगिक क्षेत्र में काम करना चाहते हैं. इसलिए उनकी दिलचस्पी पंजाब के बदले दिल्ली, गुजरात व महाराष्ट्र में बढ़ गयी है. पलायन करने वालों में 36 फीसदी एससी- एसटी तो 58 फीसदी ओबीसी समुदाय के लोग होते हैं. पलायन करने वालों में 58 फीसदी को गरीबी रेखा से नीचे बताया गया. एक आकलन के अनुसार पलायन करने वालों में 65 फीसदी के पास खेती योग्य जमीन नहीं हैं.
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साल 2012 में बिहार सरकार ने दावा किया था कि 2008 से 2012 के बीच पलायन में 35-40 फीसदी तक कमी आयी है. लोगों को बिहार में ही काम मिलने लगे हैं. खासकर कोरोना काल के दौरान कई राज्यों से लौटे काफी बिहारी श्रमिक वापस नहीं गये. उन्होंने यहीं रोजगार का साधन ढूंढ लिया. अब स्थिति ऐसी बन जाती है कि पंजाब सरकार की ओर से पत्र भेजकर कहना पड़ता कि उनके यहां फसल कटनी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. बिहार में कई जिले हैं, जहां बाहर से लौटने वाले लोगों ने छोटे-मोटे उद्योग शुरू कर लिया है और अच्छी कमाई कर रहे हैं. बिहार सरकार भी वैसे लोगों को प्रोत्साहित कर रही है.
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