मुख्य बातें
Indian Railway IRCTC: पटना, आनंद तिवारी. कोहरे की वजह से दानापुर मंडल समेत पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने वाली 90 प्रतिशत से अधिक ट्रेनें लेट चल रही हैं. पटना जंक्शन होकर गुजरने वाली अधिकतर महत्वपूर्ण ट्रेनें भी 2 से 18 घंटे तक विलंब से आ रही हैं. इनमें तेजस राजधानी, संपूर्ण क्रांति, अमृतभारत, मगध, राजेंद्र नगर हावड़ा, गरीब रथ, पाटलिपुत्र एलटीटी समेत दर्जनों प्रमुख ट्रेनें भी शामिल हैं. यह स्थिति तब है जब पूमरे के विभिन्न मंडलों में चलने वाली करीब 850 ट्रेनों (सुपरफास्ट, एक्सप्रेस व पैसेंजर शामिल) में 5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर फॉग सेफ डिवाइस लगायी गयी है, ताकि कोहरे में समय से परिचालन हो सके. लेकिन डिवाइस लगने के बाद भी तेजस राजधानी के साथ-साथ सभी ट्रेनें लेट चल रही हैं. इसके अलावा ट्रेनों का समय से परिचालन करने को लेकर कोहरे के कारण 80 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. वहीं, डैमेज कंट्रोल करने के लिए पूर्व मध्य रेलवे कुछ ट्रेनों की मॉनीटरिंग कर रहा है. इन ट्रेनों के लिए अलग से रैक की व्यवस्था कर समय से चलाने का प्रयास भी किया जा रहा है.
60 से 75 किमी की रफ्तार से चल रहीं ट्रेनें
ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान यात्री रेलवे प्रशासन की व्यवस्था से आक्रोशित होकर शिकायत कर रहे हैं. रेलवे अधिकारियों मे मुताबिक काेहरे काे लेकर सर्कुलर जारी किया गया है. इसके तहत जिन ट्रेनाें में फाॅग सेफ डिवाइस लगी है, वे अधिकतम 75 किमी और जिनमें नहीं लगी है, वे अधिकतम 60 किमी की स्पीड से ही चलेंगी. इसके बाद भी यदि लाेकाेपायलट काे लगता है कि संरक्षा के लिए स्पीड काे कम किया जाए ताे वे स्पीड कम कर ट्रेन चला सकते हैं. वहीं जानकारों की माने तो एंटी फॉग डिवाइस से केवल दो सिग्नलों के बीच 500 मीटर पहले केवल ये जानकारी मिल पाती है कि सिग्नल ग्रीन है या रेड, शेष क्षेत्र में एंटी फॉग डिवाइस लोकोपायलट के लिए उपयोगी नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक इंजन के शीशे पर कोहरे को परत छा जाती है.
इंजन में ही फॉग सेफ डिवाइस को सेट करे रेलवे
पूमरे मजदूर कांग्रेस यूनियन के मंडल अध्यक्ष जफर हसन व लोको रनिंग स्टाफ एसाेसिएशन के सदस्यों के अनुसार वर्तमान में भी कुछ मंडल के ऐसे स्टेशन हैं ड्यूटी साइन इन करने के समय क्रू लॉबी से लोको पायलट को यह डिवाइस दी जाती है. इसका वजन करीब 6 किलो होता है. लोको पायलट को अपनी किट व सामान के अलावा इसे भी बोझ की तरह ढोना पड़ता है. ऐसे में इस डिवाइस को यदि ट्रेन के इंजन में ही नियमित तौर पर सेट कर दिया जाए तो काफी बेहतर होगा. ड्यूटी के दौरान चोरी हो जाने या खो जाने पर लोको पायलट के वेतन से इसकी राशि कटौती होती है. ऐसे में रेलवे को इसे इंजन में सेट करना चाहिए.
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