घोघा नदी में अवैध तरीके से बनाये गये बांधों को JCB से काटकर हटाया गया, कल-कल कर बहने लगी जलधारा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jan 2023 10:16 AM
भागलपुर में घोघा नदी में ईंट भट्ठा संचालकों द्वारा बनाये गये दर्जनों बांधों में से पांच बांधों को जिला खनन पदाधिकारी व सबौर सीओ ने कटवा दिया.
भागलपुर: घोघा नदी में ईंट भट्ठा संचालकों द्वारा बनाये गये दर्जनों बांधों में से पांच बांधों को जिला खनन पदाधिकारी व सबौर सीओ ने बुधवार को दोपहर बाद कटवा दिया. वहीं घोघा नदी में मिलनेवाली लाहौरी नदी को प्रशस्तडीह के किसानों ने रबी फसल की सुरक्षा के लिए मिट्टी डाल कर बांध दिया. किसान लाहौरी नदी पर बनाये बांध के पास रतजगा कर रहे हैं.
प्रशस्तडीह के मुखिया अतुल कुमार पांडेय ने बताया कि घोघा नदीधार में रात से ही पानी बढ़ने लगा था. उन्होंने बताया कि कमिश्नर को पानी बढ़ने की जानकारी दी गयी. कमिश्नर ने तत्काल घोघा नदी के प्रवाह को रोकनेवाले बांध को काटने का निर्देश दिया. इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई. लहौरी नदी में बुधवार रात में बांधे गये स्थान पर सात फीट पानी भरा था. जलस्तर के और ऊपर उठने से बांध को भी ऊंचा किया जायेगा.
खनन पदाधिकारी व अंचल पदाधिकारी ने घोघा नदी को रोकनेवाले पांच बांधों को कटवाया. इनमें हीरा भट्ठा के सामने, शंकरपुर पुल के पास, घोघा बाजार के सामने व गोल सड़क के समीप का बांध शामिल है. इन सड़क के कटने पर नदी का प्रवाह कुछ तेज हुआ है, लेकिन अभी भी कई बांधों को काटना बाकी है.
हाइकोर्ट के आदेश पर बुधवार को प्रमंडलीय आयुक्त ने अपने कार्यालय में घोघा नदी में बांध बनाने के मामले में सुनवाई की. सुनवाई में बांध बनाने के मामले की स्थलीय जांच व यातायात की संभावना की तलाश संबंधी रिपोर्ट जिला खनिज विकास पदाधिकारी (डीएमडीओ) कुमार रंजन ने सौंपी. सुनवाई में जिला कृषि पदाधिकारी अनिल यादव, सदर एसडीओ धनंजय कुमार, कहलगांव एसडीओ मधुकांत, सबौर सीओ अजीत कुमार झा शामिल हुए.
डीएमडीओ ने बताया कि घोघा नदी में अवैध तरीके से बनाये गये बांधों को काट कर हटाना है. सुनवाई के बाद पांच बांध काट कर हटा दिया गया. जिस बांध को रहने देना है वहां ह्यूम पाइप लगाना है, ताकि पानी का बहाव निरंतर होता रहे. वहीं सबौर के सीओ श्री झा ने बताया कि किसानों से बात करने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त को प्रस्ताव सौंपने का निर्देश मिला है.
घोघा नदी में ईंट-भट्ठा संचालकों द्वारा बांध बनाये जाने के मामले पर प्रभात खबर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी भी हरकत में आ गये. दूसरी तरफ किसानों ने हाइकोर्ट में मामला दर्ज करा दिया था. पिछले 15 दिनों के भीतर जिला खनिज विकास पदाधिकारी, सदर एसडीओ, अपर समाहर्ता आदि पदाधिकारी स्थल का निरीक्षण किये. अब इस मामले में कार्रवाई शुरू हो गयी है. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत भी गंगा व इसकी सहायक नदियों में बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी निर्माण पर पूरी तरह रोक लगी हुई है.
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