पटना हाईकोर्ट ने फर्जी डिग्री पर बहाल शिक्षकों के मामले की सुनवाई, सरकार को दिए कार्रवाई करने के निर्देश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Mar 2023 9:01 PM
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो भी शिक्षक सरकार द्वारा निर्धारित तिथि पर कागजात व अन्य प्रमाणपत्र नहीं देंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी. इस संबंध में राज्य सरकार को प्रमाण पत्र जमा करने के लिए के समय सीमा निर्धारित करने का भ निर्देश दिया गया है.
बिहार में फर्जी डिग्रियों के आधार पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की हुई बहाली के मामले की जांच को लेकर दायर लोकहित याचिका पर पटना हाइकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. मामले में हाइकोर्ट ने एक सप्ताह का समय देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक समय सीमा निर्धारित करें, जिसके तहत सभी संबंधित शिक्षक अपनी डिग्री व अन्य कागजात संबंधित पदाधिकारी या कार्यालय में प्रस्तुत कर सकें.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो भी शिक्षक सरकार द्वारा निर्धारित तिथि पर कागजात व अन्य प्रमाणपत्र नहीं देंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी. कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह और न्यायाधीश मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने रंजीत पंडित द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
कोर्ट ने इसके पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि अदालत के सख्त निर्देश के बावजूद बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं और वेतन भी उठा रहे हैं.
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को आवश्यक निर्देश दिए. हाइकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को बुनियादी सुविधाओं का अभाव के साथ ही उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने को लेकर दायर लोकहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. कोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को कहा कि वह इस मामले की निगरानी अपने स्तर से करें, ताकि स्कूलों में पढ़ने वाले किसी भी बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो. कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य के सभी जिलों के अधिकतर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की कमी है. राज्य में कई स्कूल ऐसे हैं जो जर्जर मकान में चलते हैं. इनमें कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है.इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ ही उनके लिए शुद्ध पेयजल,शौचालय, जलपान गृह तक की व्यवस्था नहीं है . बहुत सारे स्कूलों में बिजली नहीं है, जिससे पढ़ाई में बाधा आती है.
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